कार्यक्रम में व्यस्तता के बीच समाजसेवी राजवर्धन सिंह ने कराया गरीब महिला की लाश का अंतिम संस्कार

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अंतर्ध्वनि डेस्क
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हरदोई। हम न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण,‌ फूल खुशियों के बांटे सभी को, सबका जीवन ही बन जाए मधुबन। अंकुश फिल्म में फिल्माई गई एक प्रार्थना से ली गई ये चुनिंदा पंक्तियां समाजसेवी राजवर्धन सिंह राजू के स्वभाव पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। हुआ यूं कि आज वह हरदोई के गांधी भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यस्त थे । इसी बीच उन्हें पाली क्षेत्र से संबंधित एक गरीब परिवार की मृतक महिला के बारे में जानकारी प्राप्त हुई कि परिजन उसका अंतिम संस्कार कर पाने में अक्षम हैं तो उन्होंने मृतका के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता देकर मानवता का धर्म निभाया। राजू अब तक 400 निराश्रित व गरीब व्यक्तियों की लाशों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं।



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