गोपालदास सक्सैना ‘नीरज’ हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फ़िल्मों के गीत लेखक थे। वे पहले व्यक्ति थे, जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया। वे सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रसिद्ध कवि थे, जिन्होंने अपनी मर्मस्पर्शी काव्यानुभूति तथा सरल भाषा द्वारा हिन्दी कविता को एक नया मोड़ दिया और बच्चन जी के बाद नयी पीढी को सर्वाधिक प्रभावित किया। नीरज जी से हिन्दी संसार अच्छी तरह परिचित है। जन समाज की दृष्टि में वह मानव प्रेम के अन्यतम गायक थे। ‘भदन्त आनन्द कौसल्यानन के शब्दों में “उनमें हिन्दी का अश्वघोष बनने की क्षमता है।” दिनकर के अनुसार “वे हिन्दी की वीणा हैं।” अन्य भाषा-भाषियों के विचार में “वे सन्त-कवि थे” और कुछ आलोचक उन्हें ‘निराश-मृत्युवादी’ मानते हैं। आज अनेक गीतकारों के कण्ठ में उन्हीं की अनुगूँज है।
04 जनवरी 1925 को जन्मे साहित्यकार गोपाल दास नीरज को आज उनके जन्मदिन पर नमन।