भदन्त आनन्द कौसल्यायन प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु, लेखक तथा पालि भाषा के मूर्धन्य विद्वान् थे। ये पूरे जीवन घूम-घूमकर राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रचार-प्रसार करते रहे। भदन्त आनन्द कौसल्यायन बीसवीं शती में बौद्ध धर्म के सर्वश्रेष्ठ क्रियाशील व्यक्तियों में गिने जाते थे। ये दस वर्षों तक ‘राष्ट्रभाषा प्रचार समिति’, वर्धा के प्रधानमंत्री रहे। देशवासियों की समता के ये प्रबल समर्थक थे। इन्होंने 21 वर्ष की उम्र में ही घर का त्याग कर दिया था और देशाटन के लिए निकल पड़े थे।
5 जनवरी 1905 को जन्मे भदन्त आनंद कौसल्यायन को नमन।