10 अप्रैल : भारत के छठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई आज ही के दिन नहीं रहे थे

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भारत के छठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का आज ही के दिन 1995 में निधन हो गया। वह भारत के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। हालांकि वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।

मोरारजी देसाई 1977 से 1979 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। पहले वे कांग्रेस में थे और प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम तभी से दौड़ में शामिल था। लेकिन प्रधानमंत्री का पद उन्हें कांग्रेस से अलग होने के बाद 1977 में इंदिरा गांधी की सरकार गिरने पर मिला।

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 1966 में मृत्यु के बाद जब कांग्रेस ने इंदिरा गांधी को नया प्रधानमंत्री बना दिया तो यह मोरारजी देसाई को नहीं भाया। तब उन्हें उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का पद दिया गया। लेकिन 1969 में वह पार्टी से अलग हो गए। 1975 में आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जो आंदोलन चला उसमें मोरारजी भी शामिल थे। इस आंदोलन से निकली जनता पार्टी जब 1977 के चुनावों में जीत कर आई तो मोरारजी देसाई का प्रधानमंत्री पद के लिए लंबा इंतजार खत्म हुआ।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ अहम भूमिका निभाई। 1930 से 1940 के बीच उन्होंने करीब 10 साल ब्रिटेन की जेल में बिताए। वह पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्हें भारत और पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और निशान ए पाकिस्तान से नवाजा गया।

1980 के आम चुनाव में भी वह जनता पार्टी की तरफ से चुनावी प्रचार में शामिल हुए, हालांकि उन्होंने खुद चुनावी दौड़ में हिस्सा नहीं लिया। रिटायरमेंट के बाद वह मुंबई में रहने लगे। वहीं 10 अप्रैल 1995 को 99 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।