हरदोई : 10 वर्ष तक की बच्चियों के लिए अमृत कलश है संजिति योजना

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बेटी के जन्मदिन पर शुरू योजना से 141 बच्चियों का निःशुल्क ऑपरेशन कर चुके बॉस

07 सितम्बर 2016 को डॉ0 एसके सिंह और अंजलि सिंह ने बिटिया संजिति के जन्मदिवस पर शुरू की थी विपन्न परिवारों की 10 वर्ष तक की बच्चियों के निःशुल्क ऑपरेशन की योजना

बृजेश ‘कबीर’
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अपने शहर में तमाम चिकित्सक हैं जो पेशे को सामाजिक सरोकारों से सम्बद्ध करते हुए मानवीय मूल्यों को भी जीते हैं। इसकी नजीर रानी साहिबा कटियारी हॉस्पिटल में संचालित संजिति योजना है। बात सितम्बर 2016 की है, जब ख्यात सर्जन डॉ0 एसके सिंह (चाहने वालों के बीच बॉस पुकारे जाते) और अंजलि सिंह की लाडो संजिति के जन्मदिवस पर दम्पति ने उसके नाम से एक गहरे सरोकार की आधारशिला रखी थी। तत्कालीन जिलाधिकारी विवेक वार्ष्णेय की पत्नी डॉ0 अनु वार्ष्णेय ने संजिति योजना का अनावरण किया था। योजना के तहत विपन्न परिवारों की 10 वर्ष तक की बच्चियों को ज़रूरत पड़ने पर निःशुल्क ऑपरेशन की सुविधा की बात थी।

तब, इस खबर को अंतर्ध्वनि एन इनर वॉइस ने प्रमुखता से दिया था। उसके बाद वक़्त बीतता गया। कई मर्तबा डॉ0 सिंह से योजना से लाभान्वित बच्चियों का ब्यौरा देने की गुजारिश की, पर हर बार वह टाल जाते थे। आज आखिर वह मान ही गए और वो रजिस्टर सामने था, जिसमे योजना के तहत नवजीवन पाई बच्चियों का लेखा जोखा बाकायदा बच्चियों की फोटो, उनके अभिभावकों के नाम, पता, कॉन्टेक्ट नम्बर, ऑपरेशन की तारीख और मर्ज के प्रकार के साथ दर्ज मिला। योजना शुरू होने के बाद से इस बरस 30 सितम्बर तक 141 बच्चियों के निःशुल्क ऑपरेशन डॉ0 एसके सिंह कर चुके हैं। भले ही सुनने-पढ़ने में सामान्य सी बात लगे, पर है ये निश्चित ही असाधारण कार्य। खास बात यह कि, संजिति योजना का अनावरण पट आज भी हॉस्पिटल के मुख्य द्वार पर जस का तस मौजूद है, ताकि वहां जाने वालों को जानकारी होती रहे और संदेश प्रसारित होता रहे। कहना गलत नहीं होगा कि विपन्न परिवारों की बच्चियों के लिए संजिति योजना किसी ‘अमृत कलश’ से कम नहीं है और इस योजना से लाभान्वित होने वाली बच्चियों की तादाद भविष्य में सैकड़ों में जाएगी।

चलते-चलते कुछ और भी कहने का जी है…

ईश्वर के बाद किसी से आशा रखी जाती है वह है डॉक्टर। भगवान का नाम बाद में पहले डॉक्टर याद आता है, बड़ी उम्मीद के साथ। उसका केवल यह कहना कि चिन्ता की कोई बात नहीं, मन को सुकून मिल जाता है, आधी बीमारी भाग जाती है। यहां सब कोई बराबर होता है, न कोई अमीर न कोई गरीब, न जात-पात न धर्म का बंधन। अपनी जीवन की डोर उस के हाथ सौंपते हैं। रात हो या दिन हर वक्त इलाज को तत्पर, दंगा-फ़साद हो या दुर्घटना, ला-इलाज बीमारी हो या सर्दी-जुखाम, वह पूरी क्षमता और ज्ञान के साथ प्रस्तुत होता है। अगर अच्छा हो जाए तो तमाम दुआएं मिलती हैं, हर कोई धन्यवाद देता है, चेहरे खिल उठते हैं। पर, अगर वह सफल न हुआ तो तोड़-फोड़ शुरु हो जाती है। वह ईश्वर तो नहीं है। वह भी जब ऑपरेशन करता होगा तो कामना करता होगा कि उसके हाथ कांपें नहीं। तभी तो कहता है, ऑपरेशन सफ़ल है, आगे ऊपर वाले के हाथ है। जीवन बचाने वाले का धन्यवाद तो करना ही चाहिए। कभी नहीं सफ़ल, पर कोशिश तो की। डॉक्टर का सम्मान सभी की जिम्मेदारी है। आख़िर उसके भरोसे तो हम हैं, ऊपर वाला तो नहीं आ सकता, तभी तो उसने अपने प्रतिनिधि के रूप में उसे भेजा है।

अन्त में, संजिति योजना के जनक डॉ0 एसके सिंह और जननी अंजलि सिंह को ढेरों शुभ कामनाएं और बधाई, पेशे को सामाजिक सरोकारों से सम्बद्ध कर मानवीय मूल्यों को जीने के लिए। ईश्वर ने आप को पीड़ितों को स्वस्थ करने का निमित्त बनाया है, ये सौभाग्य का विषय है।