23 फ़रवरी : आज ही के दिन नहीं रही थीं ‘मधुबाला’

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वर्ष 1942 में मधुबाला को बतौर बाल कलाकार ‘बेबी मुमताज’ के नाम से फिल्म ‘बसंत’ में काम करने का मौका मिला। बेबी मुमताज के सौन्दर्य से अभिनेत्री देविकारानी काफी मुग्ध हुईं और उन्होंने उनका नाम ‘मधुबाला’ रख दिया। उन्होंने मधुबाला से बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘ज्वार-भाटा’ में दिलीप कुमार के साथ काम करने की पेशकश भी कर दी, लेकिन मधुबाला उस फिल्म में किसी कारणवश काम नहीं कर सकी। ‘ज्वार-भाटा’ हिन्दी की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है। इसी फिल्म से अभिनेता दिलीप कुमार ने अपने सिने करियर की शुरुआत की थी।

मधुबाला, हृदय रोग से पीड़ित थीं जिसका पता 1950 मे नियमित होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण मे चल चुका था। परन्तु यह तथ्य फ़िल्म उद्योग से छिपाए रखा गया। लेकिन जब हालात बदतर हो गये तो ये छिप ना सका। कभी – कभी फ़िल्मो के सेट पर ही उनकी तबीयत बुरी तरह खराब हो जाती थी। चिकित्सा के लिये जब वह लंदन गयी तो डाक्टरों ने उनकी सर्जरी करने से मना कर दिया क्योंकि उन्हे डर था कि वो सर्जरी के दौरान ही मर जायेंगीं। जिन्दगी के अन्तिम 9 साल उन्हे बिस्तर पर ही बिताने पड़े। 23 फ़रवरी 1969 को बीमारी की वजह से उनका स्वर्गवास हो गया। उनके मृत्यु के 2 साल बाद यानि 1971 मे उनकी एक फ़िल्म जिसका नाम ‘जलवा’ था प्रदर्शित हो पायी थी।

हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।