4 जुलाई : स्वामी विवेकानंद का स्मृति दिवस है आज

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आम तौर पर हम अपनी वृत्ति (प्रकृति) के गुलाम होते हैं। मीठी बातों पर मुस्कुराते रहते हैं, लेकिन जब कोई कड़वी बात कह दे तो दुखी हो जाते हैं। भीतर की स्वाधीनता के लिए हमें अपनी वृत्ति से निवृत्ति पानी होगी। स्वामी विवेकानंद के स्मृति दिवस (4 जुलाई) पर उनका चिंतन..

एक बार जब मैं बोस्टन में था, तो एक दिन एक युवक मेरे पास आया और मेरे हाथ पर उसने एक कागज का टुकड़ा रख दिया। कागज पर किसी व्यक्ति का नाम-पता और संदेश हाथ से लिखा था। उसमें संदेश लिखा था कि दुनिया की सारी दौलत और सुख पाने की तरकीब सीखिए। फीस सिर्फ पांच डॉलर। उसने मुझसे पूछा – आपका क्या विचार है? मैंने कहा – पहले कम से कम इसे छपाने के लिए पैसा तो कमा लो, फिर दौलत कमाने की तरकीब सिखाना। मेरे कहने का आशय वह नहीं समझ सका। वह इसी विचार में मस्त था कि बिना कोई तकलीफ उठाए ही उसे तमाम सुख और पैसा मिल जाएगा।

स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। 4 जुलाई 1902 को उनका देहावसान हुआ था। कृतज्ञ राष्ट्र का उन्हें शत शत नमन।