प्रदीप हिंदी साहित्य जगत् और हिंदी फ़िल्म जगत् के एक अति सुदृढ़ रचनाकार रहे। कवि प्रदीप ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सरीखे देशभक्ति गीतों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 1962के ‘भारत-चीन युद्ध’ के दौरान शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में ये गीत लिखा था। ‘भारत रत्न’ से सम्मानित स्वर कोकिला लता मंगेशकर द्वारा गाए इस गीत का तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में 26 जनवरी 1963 को दिल्ली के रामलीला मैदान से सीधा प्रसारण किया गया था। यूँ तो कवि प्रदीप ने प्रेम के हर रूप और हर रस को शब्दों में उतारा, लेकिन वीर रस और देश भक्ति के उनके गीतों की बात ही कुछ अनोखी थी।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी ने लखनऊ की पत्रिका ‘माधुरी’ के फ़रवरी, 1938 के अंक में प्रदीप पर लेख लिखकर उनकी काव्य-प्रतिभा पर स्वर्ण-मुहर लगा दी। निराला जी ने लिखा- “आज जितने कवियों का प्रकाश हिन्दी जगत् में फैला हुआ है, उनमें ‘प्रदीप’ का अत्यंत उज्ज्वल और स्निग्ध है। हिन्दी के हृदय से प्रदीप की दीपक रागिनी कोयल और पपीहे के स्वर को भी परास्त कर चुकी है।

कवि सम्मेलन में उनके गीतों को सुनकर ‘बाम्बे टॉकीज स्टूडियो’ के मालिक हिंमाशु राय काफ़ी प्रभावित हुए और उन्होंने प्रदीप को अपने बैनर तले बन रही फ़िल्म ‘कंगन’ के गीत लिखने की पेशकश की। इस फ़िल्म में अशोक कुमार एवं देविका रानी ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं। 1939 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘कंगन’ में उनके गीतों की कामयाबी के बाद प्रदीप बतौर गीतकार फ़िल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। इस फ़िल्म के लिए लिखे गए चार गीतों में से प्रदीप ने तीन गीतों को अपना स्वर भी दिया था। इस प्रकार ‘कंगन’ फ़िल्म के द्वारा भारतीय हिंदी फ़िल्म उद्योग को गीतकार, संगीतकार एवं गायक के रूप में एक नयी प्रतिभा मिली। सन 1943 में मुंबई की ‘बॉम्बे टॉकीज’ की पांच फ़िल्मों- ‘अंजान’, ‘किस्मत’, ‘झूला’, ‘नया संसार’ और ‘पुनर्मिलन’ के लिये भी कवि प्रदीप ने गीत लिखे।

‘फ़िल्मिस्तान’ फ़िल्म निर्माण संस्था से अनुबंधित होने पर भी आंतरिक राजनीति के कारण कवि प्रदीप से गीत नहीं लिखाए जा रहे थे। इससे दु:खी होकर वे ‘मिस कमल बी.ए.’ के छद्म नाम से गीत लिखने लगे। उन्होंने चार फ़िल्मों के लिए इसी नाम से गीत लिखे। इस नाम के कारण एक बार तो काफ़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो गई। ‘न्यू थियेटर’ की लीला देसाई की कमल नाम की एक बहन थी, जो ‘मिस’ भी थी और ‘बी.ए.’ भी। जाने कैसे प्रशंसकों ने उनका पता ढूंढ लिया और उन्हें पत्र लिखने लगे। कुछ लोगों ने तो शादी के प्रस्ताव भी रख दिए। उन्होंने प्रेस विज्ञाप्ति निकालकर कहा कि वे गीत नहीं लिखती हैं।

आज उनके जन्मदिन पर उन्हें शत शत नमन।

फेसबुक से टिप्पणी करें

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here