7 अगस्त : आज ही के दिन नहीं रहे थे गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर

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रबीन्द्रनाथ ठाकुर अथवा रबींद्रनाथ टैगोर बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे। भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ रूप से पश्चिमी देशों का परिचय और पश्चिमी देशों की संस्कृति से भारत का परिचय कराने में टैगोर की बड़ी भूमिका रही तथा आमतौर पर उन्हें आधुनिक भारत का असाधारण सृजनशील कलाकार माना जाता है।

रबिन्द्रनाथ टैगोर को अपने जीवन में, कई उपलब्धियों या सम्मान से नवाजा गया परन्तु, सबसे प्रमुख थी “गीतांजलि” 1913 मे, गीतांजलि के लिये, रबिन्द्रनाथ टैगोर को “नोबेल पुरुस्कार” से सम्मानित किया गया।

रबिन्द्रनाथ टैगोर ने, भारत को और बंगला देश को, उनकी सबसे बड़ी अमानत के रूप मे, राष्ट्रगान दिया है जोकि, अमरता की निशानी है। हर महत्वपूर्ण अवसर पर, राष्ट्रगान गाया जाता है जिसमे, भारत का “जन-गण-मन है” व बंगला देश का “आमार सोनार बांग्ला” है।

यह ही नही रबिन्द्रनाथ टैगोर अपने जीवन मे तीन बार अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक से मिले जो रबिन्द्रनाथ टैगोर जी को रब्बी टैगोर कह कर पुकारते थे।

7 अगस्त 1941 को उनका निधन हो गया। शत शत नमन।

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