8 अगस्त : आज ही के दिन 1942 में पारित हुआ था ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव

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8 अगस्त, 1942 को कांग्रेस के अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित किया गया। बंबई के गोवालिया टैंक मैदान पर अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति ने वह प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद से ही ये आंदोलन व्‍यापक स्‍तर पर आरंभ किया गया।

9 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की चिंगारी पूरे देश में फैल गई थी। यह एक ऐसा व्यापक आंदोलन था, जिसने अंग्रेजी शासन को हिला दिया और आखिरकार 15 अगस्त, 1947 को भारत को आजाद करना पड़ा।

इस आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था और यह आंदोलन सोची-समझी रणनीति का हिस्‍सा था। इस आंदोलन में पूरा देश शामिल हुआ था और ग्वालिया टैंक मैदान में दिए गए गांधी जी के भाषण का बिजली का सा असर हुआ था। गोवालिया टैंक मैदान में जो भाषण दिया था उसमें उन्होंने आमजन से कहा था कि मैं आपको एक मंत्र देना चाहता हूं जिसे आप अपने दिल में उतार लें, यह मंत्र है, करो या मरो’। बाद में इसी गोवालिया टैंक मैदान को अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना गया। आंदोलन जन आंदोलन बनना शुरू हुआ वैसे ही अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को जेल में डालना शुरू कर दिया। गांधी, नेहरू, पटेल, आजाद समेत कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस आंदोलन में 940 लोग मारे गए थे, जबकि 60229 लोगों ने गिरफ्तारियां दी थीं। बताया जाता है कि महात्‍मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने भाषणों में कहा था कि अगर हिंदू और मुसलमान मिलकर रहेंगे तो हम आजादी हासिल कर लेंगे।के रहेंगे।

भारत छोड़ो आंदोलन’ मूल रूप से एक जनांदोलन बन गया था, जिसमें भारत के हर जाति-वर्ग के लोग ने भाग लिया था। खास बात ये है कि इस आंदोलन में युवाओं की बड़ी भागेदारी थी। यहां तक की छात्रों ने स्कूल और कॉलेज छोड़ दिए थे और आंदोलन में शामिल हो गए थे। हालांकि उनमें से कइयों को जेल भी जाना पड़ा था।

महात्मा गांधी समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया तो इसकी कमान आमजन ने अपने हाथ में ले ली। लेकिन, सबसे खास बात यह थी कि जो आंदोलन अंहिसक तरीके से किए जा रहा था वह अचानक हल्का हिंसात्मक हो गया था। आंदोलन की अगुवाई छात्रों, मजदूरों और किसानों ने की थी। कई क्षेत्रों में किसानों ने वैकल्पिक सरकार तक बना डाली थी। उत्तर और मध्य बिहार के 80 प्रतिशत थानों पर जनता का राज हो गया था। पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार में गया, भागलपुर, पूर्णिया और चंपारण में अंग्रेजों के खिलाफ स्वत: स्फूर्त विद्रोह हुआ।
आंदोलन का व व्यापक रूप को देखते हुए अंग्रेजों को विश्वास हो गया था कि उन्हें अब इस देश से जाना पड़ेगा। कांग्रेस को गैरकानूनी संस्था घोषित कर दिया गया था। लेकिन, पार्टी के दूसरी पंक्ति के नेता जय प्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया और अरुणा आसफ अली की अगुवाई में देशव्यापी प्रदर्शन हुआ।

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