महिला दिवस : कवयित्री गोष्ठी ने बांधा समां, पेश की अनूठी मिसाल

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अंतर्ध्वनि जन कल्याण समिति के तत्वावधान में ज़िला प्रशासन के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कवयित्री गोष्ठी का आयोजन स्थानीय रसखान प्रेक्षागृह में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ज़िलाधिकारी पुलकित खरे ने कवयित्रियों की सराहना करते हुए काव्यमंच को अनूठा आयोजन बताया।
उन्होंने कहा कि जनपद में इस तरह के आयोजन सांस्कृतिक माहौल को बढ़ावा देंगे। गोष्ठी को नगर मजिस्ट्रेट वंदिता श्रीवास्तव व फ़िल्म अभिनेता राहुल चौहान ने भी संबोधित किया। काव्य गोष्ठी के प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए नारी शक्ति पर काव्य पाठ करते हुए रत्ना मिश्रा ने कहा, “नारी को कमजोर न समझो, इसकी शक्ति निराली है। क्यों कहते सब अबला इसको, क्या यह कम बलशाली है।।” इसी क्रम में दीक्षा सविता ने कहा, “बेटियाँ हैं वो झरोखा जो न देती कभी धोखा, बेटो से आगे जहाँ में आज की ये बेटियाँ। कवयित्री प्रतिमा शैलेन्द्र ने कविता पढ़ी, “मैं ममता से भरी हुई, हर रूप मैं सुखदाई हूँ। मैं उनकी ही जननी हूँ , जिनके द्वारा ठुकराई हूँ।” महिला दिवस पर इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए माँ की ममता पर प्रकाश डालती कविता पढ़ी, “माँ की ममतामयी मोती का कोई मोल नही, उसकी लोरी से ज्यादा कोई गीत अनमोल नही” अनुपम अविनाश ने कविता प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए कहा, “नसीबों पर अंन्धविश्वास मत करना, हौसला ए जिगर ह्रास मत करना, क्योंकि
किस्मत’ हथेली पर उकेरी चंद रेखाओं की मोहताज नही होती” इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उदीयमान कवयित्री आकांक्षा पांडेय ‘उपासना’ ने काव्य पाठ करते हुए कहा, ” मैं आधुनिक युग की नारी हूँ, कमज़ोर नहीं हूँ मैं, सीमा को लांघना सीखा नहीं कभी, ऐसे संस्कार मुझे मिले नहीं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए स्नेह सिंह ने कहा, “आज सारी श्रृंखलाएं मैंने तोड़ दी हैं, जीने की राह मैंने ख़ुद ढूंढ़ ली है।” कवयित्री कल्पना ने राष्ट्र को जागृत करने वाली कविता पढ़ते हुए कहा, जन जन के जननायक, जन गण मन का जय जयकार करो, वंदेमातरम वंदेमातरम ध्यान करो।” कवयित्री सुरभि पांडेय ने होली पर काव्य पाठ करते हुए कहा, मत मारो श्याम फगुनवा में पिचकारी का रंग, पड़ जाएगा होरी में, लाल मेरी सारी का रंग।मीरा द्विवेदी ने कहा, “जूझना चाहती हूं उन थपेड़ों से, चलना चाहती हूं उन तपती, पथरीली राहों पे, क्यों नहीं कर सकती मैं ऐसा?, इसी क्रम में अपूर्वा अवस्थी ने अपनी पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए कहा, “बाह्य शोर से मुक्त करें मन, अंतर्ध्वनि सुन पाएँ हम। टूटे हृदयों का सम्बल बन, विश्व-शांति धुन गाएँ हम।” कवयित्री अमिता मिश्रा ‘मीतू’ ने अपनी पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए कहा, “ओ शकुंतले,श्यामकुंतले कैसे तुम्हें भुलाएं, हम भारतवासी तेरे चरणों मे, क्या क्या आज चढ़ाएं।” डॉ श्वेता सिंह गौर ने कहा, “मैं बेटी,भगिनी,पत्नी हूँ, मैं जन्मदात्री जननी हूँ, मैं प्रेमपूर्ण, वात्सल्यमयी, मैं वसुधा रत्न-प्रसविनी हूँ,” चंद्रकिरण अग्रवाल ने कहा, “जन्म से ही पूर्ण हो तुम, सम्पूर्ण हो तुम, हो खुशी, अहसास तुम”
गोष्ठी का संचालन व संयोजन अपूर्वा अवस्थी और डॉ श्वेता सिंह गौर ने किया।
इस अवसर पर अंतर्ध्वनि महासचिव कुलदीप द्विवेदी, राकेश पांडेय, अभिषेक गुप्ता, दीपक कपूर, चिंतन बाजपेई, विमलेंदु वर्मा आदि मौजूद रहे।