15 फ़रवरी : आज ही के दिन नहीं रहे थे महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब

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“मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” (27 दिसंबर 1796 – 15 फरवरी 1869) उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर थे। इनको उर्दू भाषा का सर्वकालिक महान शायर माना जाता है और फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी ज़ुबान में लोकप्रिय करवाने का श्रेय भी इनको दिया जाता है।

ग़ालिब की मुगल दरबार में बहुत इज्जत थी और वो उन पर व्यंग्य करने वालों पर शायरी लिख दिया करते थे | उनकी 15 फ़रवरी 1869 को दिल्ली में मौत हो गयी | ग़ालिब पुरानी दिल्ली के जिस मकान में रहते थे उसको ग़ालिब की हवेली कहा जाने लगा और बाद में उसे एक स्मारक में तब्दील कर दिया गया |ग़ालिब की कब्र दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में निजामुद्दीन ओलिया के नज़दीक बनाई गयी।

आज ही के दिन नहीं रहे थे ग़ालिब। हमारी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।