आज डॉक्टर हरिशंकर मिश्र ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेज़ मलिहामऊ हरदोई में 11वीं नेशनल डिज़ास्टर रिस्पांस फोर्स वाराणसी के डीआईजी आलोक कुमार सिंह के आदेश पर आरआरसी लखनऊ के ज़ोनल कमांडेंट द्वारा उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में चलाए जा रहे सुरक्षा कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षक शिक्षिकाओं को आपदा से लड़ने हेतु कैसे तैयार किया जाता है के संदर्भ में एक सेमिनार का आयोजन किया गया।
एनडीआरएफ ने आपदा प्रबंधन में अपनी वैश्विक छाप छोड़ी है। अपने आदर्श वाक्य ‘आपदा सेवा समर्पण’ को सार्थक करते हुए वृहद पैमाने पर बहुमूल्य मानव जीवन को बचाने के साथ साथ भारत में आपदा प्रबंधन क्षमता निर्माण और सार्वजनिक जागरूकता के संबंधित विभिन्न योजनाओं में भी अपना योगदान दिया है।
इस क्रम में आज उप जिलाधिकारी सदर ओम प्रकाश गुप्ता ने महाविद्यालय में दीप प्रज्वलित कर मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर एनडीआरएफ के कमांडेंट अब्दुल्ला खान ने भी सरस्वती जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। तत्पश्चात महाविद्यालय के संरक्षक धनंजय मिश्र द्वारा मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया तथा महाविद्यालय के प्राचार्य मनोज सिंह, इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रवि नारायण मिश्र सहित मांटेसरी की प्रधानाचार्य क्रांति गुप्ता द्वारा आए हुए अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। महाविद्यालय प्रांगण में कई फैकल्टी के विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद रहे और उनको दैवीय और प्राकृतिक आपदा से बचाव के गुण और हुनर सिखाए गए। जिस में एनडीआरएफ की टीम ने आपदा से लड़ने एवं जीवन बचाने के उपाय बताये।
डॉ हरिशंकर मिश्र महाविद्यालय के प्रांगण में एनडीआरएफ की टीम ने दैवीय आपदा से लड़ने व जीवन रक्षा के बच्चो को गुर सिखाए। एनडीआरएफ की टीम ने बाढ़ से पूर्व, पश्चात व बाढ़ के दौरान जीवन बचाने के तरीके प्रयोग करके दिखाए। टीम ने भूकंप का परिचय कराते हुए कि चट्टानों के घर्षण से भूकम्प आता है।ज्यादातर भूकंप एक डिग्री सेल्सियस की तीव्रता से ही आये। छः डिग्री से अधिक की तीव्रता वाला भूकंप सबसे खतरनाक होता है। ऐसी स्थिति में खुले में पहले से ही सेफ्टी ज़ोन तय हो। जहाँ पेंड़ ,भवन आदि न हों।उनका सुझाव था कि भवनों में भूकंप का अलार्म भी हो। उन्होंने भूकंप से बचने के लिए विविध तरीके प्रयोग कर बताये। घरेलू उपाय में लाइफ जैकेट का उपयोग बताया। संकट में वैकल्पिक प्रयोग सिखाये। आपदा के समय बोतलों, मटका व जरीकेन का प्रयोग भी समझाया। कम्बल, रस्सी, बांस व बोरी से इम्प्रोवाइज़ स्ट्रक्चर तैयार करना सिखाया। आकस्मिक आपदा में घायलों तक तय जगह पहुंचना व घायल को सुरक्षित जगह पर लाने के उपाय भी बताए। इसके अलावा मार्ग दुर्घटना, दिल के दौरे से बचने के भी प्रदर्शन किये। कंट्रोल ब्लीडिंग, सीपीआर, हेड इंजरी एवं अन्य प्रकार की चोटों का भी प्राथमिक उपचार करना सिखाया।
इस अवसर पर प्रबंधक धनन्जय मिश्रा ने कहा कि दैवीय आपदा प्रबंधन के गुर सभी को आने चाहिए।विभिन्न पाठ्यक्रमों में इस विषय को सम्मिलित भी किया गया है। जीवन रक्षा के लिए घरेलू और तात्कालिक प्रयोग बहुत कारगर सिद्ध हुए हैं।उन्होंने एनडीआरएफ टीम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम के आयोजक श्याम जी मिश्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
एनडीआरएफ टीम कमांडर अब्दुल्लाह खान, उप कमांडर शेर सिंह, आदित्य दीक्षित आदि लोगों ने प्रशिक्षित किया।