आवास योजना को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल, मौजूदा सरकार के विधायक ने कहा रिश्वत नहीं तो आवास नहीं

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कल फेसबुक पर शिव यादव की एक पोस्ट के बाद आवास योजना को लेकर ढेर सारी बातें होना शुरू हो गईं। इसी क्रम में राज चौहान लिखते हैं, आपको बताते चलें कि जिस आवास योजना को सरकार अपनी सबसे बड़ी सफ़ल योजनाओं में से एक बताती है वह अब हवा हवाई दिखती नज़र आ रही है, सोशल मीडिया पर हरदोई ज़िले का एक ऐसा ही मुद्दा सामने आया है जहाँ कच्ची मिट्टी का बना मकान जो पूरी तरह से बेकार हो चुका है।

राज चौहान

छत के नाम पर छप्पर है पर पानी के कहर से पूरा छलनी हो चुका है, जहां जनप्रतिनिधियों की नज़र नही दौड़ती उस कच्चे मकान में पानी सरपट उसके अंदर दौड़ जाता है, जब मुद्दा सोशल मीडिया पर छाया तो हरदोई ज़िले के गोपामऊ विधानसभा के विधायक अपना दर्द बयां करते नज़र आये जो कि मौजूदा सरकार के विधायक हैं। अपनी त्वरित प्रतिक्रियाओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहते वाले विधायक श्याम प्रकाश ने सोशल मीडिया की उसी पोस्ट पर लिखा कि इस महिला को आवास नही मिल सकता, क्योंकि यह रिश्वत नही दे सकती? कहीं न कहीं साफ़ ज़ाहिर हो रहा है कि अब जनप्रतिनिधियों के हाथ बंधे से दिख रहे हैं!

और कि जो ग़रीबी का ज़िक्र करके बार-बार उसी के सहारे गांव के ऐसे दुखियारे लोगों की आँखों मे उम्मीद की एक किरण जगाते हैं, भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शायद ही ऐसी कोई सभा हो जहां वो अपने बचपन मे बीती ग़रीबी की बात न करते हों, आज उनकी सरकार सत्ता में है उनका कहना है कि विकास हुआ, उनका कहना कि केंद्र से लेकर राज्य और मुख्य कार्यकारिणी से लेकर ज़िला स्तर और ब्लॉक तक सभी साफ़ नीयत के व्यक्ति हैं। अगर ज़िक्र करें प्रधानमंत्री का या ज़िक्र करें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का तो लोग कहेंगे एक- एक व्यक्ति तक वह स्वयं नही आएंगे तो क्या ज़िलास्तरीय भाजपा पदाधिकारियों की भी नज़र इस ओर नही पड़ती? क्या क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि चुनाव से पूर्व उस क्षेत्र में गए नही होंगे? क्या उन्होंने उसे नज़र अंदाज़ किया और नज़र फेर ली? सवाल बहुतेरे हैं, पर ग़रीबी जो किसी को दिखती नही ब्लॉक ,क्षेत्र, ज़िला स्तर सभी सत्ता के पदाधिकारियों की नज़र उस ओर दौड़ती नही जिधर बारिश में घर के भीतर पानी सरपट दौड़ लगाकर भर जाता है! जहां रहने के लिए छत तो है पर वो कब ढह जाए और ज़िन्दगी को अपनी तरह मिट्टी बना ले यह कोई नही जानता!
इन बूढ़ी आँखों मे एक आस है पर ये आँखें कब बंद हो जाएं यह कोई नही जानता और शायद इन्ही के साथ वो आस भी दफ़न हो जाये, आवास योजना को मुख्य रूप से ग़रीबी और कच्चे मकानों में रह रहे लोगों के लिए होगी, पर सरकार से लेकर सत्ता और क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शायद न ही ये ग़रीब दिखती हैं ना ही असहाय और न ही भूमिहीन!
न जाने कब आएगा रामराज ? न जाने कब इन बूढ़ी आँखों के सपने होंगे पूरे?
अग़र इसे सरकार साफ़ नीयत कहती है तो ऐसी साफ़ नीयत से घृणा करना चाहिए? अग़र भाजपा इसे भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम कहती है तो ऐसे सिस्टम से घृणा करनी चाहिए?
यह कुरसठ नगर पंचायत के मोहल्ला सुभाष नगर की लालती पत्नी सरजू प्रसाद हैं जो भूमिहीन और असहाय बुजुर्ग महिला हैं जैसा कि तस्वीर में स्पष्ट दिखाई ही दे रहा है अपनी टूटी हुई झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। लक्ष्य अन्त्योदय सबको आवास जैसी योजनाएं इनके लिए बेकार हैं! क्योंकि न ही सरकार और न उनके प्रतिनिधि और न ही उनके पदाधिकारियों न ही सरकार के साफ़ नीयत के अफसर इन्हें इन योजनाओं का लाभ देना ज़रूरी समझते हैं।
अब देखना यह होगा कि जब जनप्रतिनिधियों की नज़र पड़ी है तो क्या आवास योजना का लाभ दिला सकेगी या यूँ ही आवास योजना काग़ज़ों में सिमट कर रह जायेगी। यह पूरा वाक्या विधानसभा बिलग्राम के कुरसठ नगर पंचायत का है जहाँ के मौजूदा विधायक आशीष सिंह (आशू) भाजयुमो उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष नियुक्त किये गए हैं और आज उपाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार अपने जनपद हरदोई जाएंगे।