गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अन्तर्ध्वनि ने आयोजित की कवयित्री गोष्ठी

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अन्तर्ध्वनि जन कल्याण समिति के बैनर तले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आधी आबादी की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें ख्यातिलब्ध कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया।

कवयित्री गोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर मुख्य अतिथि सर्वोदय आश्रम की अध्यक्ष उर्मिला श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी आज लगभग हर क्षेत्र में हैं। आज की गोष्ठी में कवयित्रियों की भागीदारी साहित्यिक क्षेत्र में उनकी सम्यक उपस्थिति का परिचायक है। महासचिव कुलदीप द्विवेदी ने कहा कि कवयित्री गोष्ठी संस्था का अनूठा प्रयास है, जिससे उभरती प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में संस्था सहयोग करती है। गोष्ठी की संयोजक अपूर्वा अवस्थी ने कहा कि पिछले वर्ष की भाँति इस वर्ष भी कवयित्री सम्मेलन का आयोजन संदेश देता है कि आधी आबादी का दायरा विस्तृत हो रहा है। इस अवसर पर भारत विकास परिषद के अध्यक्ष अविनाश चन्द्र गुप्ता ‘अब्बी’ ने सभी कवयित्रियों को प्रमाण पत्र वितरित किए व आयोजन की सराहना की।

कवयित्री गोष्ठी का संचालन करते हुए पंक्तियां प्रस्तुत कीं, कुछ गीत मै गुनगुना रही, संगीत मन का बजा रही, आ जाओ प्रिय अब सामने, नज़रों में तुमको बुला रही। इसी क्रम में चन्द्र किरन अग्रवाल ने पंक्तियों के माध्यम से कहा, ज़िन्दगी इक दौड़ है, और हम सभी हैं यात्री। रास्ते सबके अलग पर, एक ही मंजिल आखिरी। मीरा द्विवेदी ने झंझावातों पर कहा, जीवन के झंझावातों को कुछ तुम झेलो कुछ हम झेलें, दुनिया मे अगर आए हो, कुछ तुम जी लो, कुछ हम जी लें। अपूर्वा अवस्थी ने पंक्तियों के माध्यम से कहा कि मैं भावुक हूँ कमज़ोर नहीं, मैं शान्तिदूत हूँ शोर नहीं। मैं पावस की रिमझिम फ़ुहार, मैं प्रलय घटा घनघोर नहीं। अमिता मिश्रा ‘मीतू’ ने पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हुए कहा, है जमी ये जल रही, आसमा ये जल रहा, घर पड़ोसी का नहीं ये,देश मेरा जल रहा। क्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रतिमा शैलेन्द्र ने कहा कि, तुमको ही चाहता है, पागल ये मन मेरा। मैं करूँ तो क्या मैं करूँ तो क्या। अनुपम अविनाश ने पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं, मेरे देश मेरे देश, मेरे प्यारे स्वदेश, तुझको है मेरा नमन। नमन नमन नमन। अक्षरा मिश्रा ने अपनी रचना पेश करते हुए कहा, मै मीरा बन तुझे पूजूँ, तू मेरा ध्येय हो जाए , मै बन जाऊं तेरी राधा तू मेरा प्रेम हो जाए।

इस अवसर पर पूर्व डीजीसी अविनाश चंद्र गुप्ता, विनीता पांडेय, निशा गुप्ता, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, राधेश्याम मिश्र, रानी शुक्ला, महेंद्र श्रीवास्तव उपस्थित रहे।