प्रेसवार्ता करते हुए सवर्ण चेतना समिति के पदाधिकारी
आर्य समाज हरदोई का साप्ताहिक यज्ञ एवं अधिवेशन आज रविवार को प्रातः आर्य समाज मंदिर में हुआ साथ ही आर्य प्रतिनिधि सभा महाराष्ट्र के आमंत्रण पर 1 महीने के लिए श्रावण वेद प्रचार को जा रहे जनपद के प्रख्यात महोपदेशक विमल कुमार आर्य को प्रधान राजीव रंजन के साथ आर्यजनों ने अंगवस्त्र ओढ़ाकर हर्षोल्लास से विदाई दी।
वैदिक महोपदेशक विमल कुमार आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति अर्थात वेद आर्यावर्त भारत का सांस्कृतिक आधार है। कहा, वेद ज्ञान का भंडार हैं पर दासता के दौर में भारत में विदेशी सभ्यता पनपने से समाज शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में अपनी मूल एवं लोक कल्याणकारी वैदिक संस्कृति से दूर हो गया। जिससे अंधविश्वास, पाखंड का बोलबाला बढ़ा और नैतिक पतन हुआ। महोपदेशक आर्य ने कहा कि नेपाल के काठमांडू में हुए विश्व आर्य महासम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह के साथ के भी प्रदेश की ओर से पहुंचे और सभी ने वैदिक संस्कृति की पुनर्स्थापना का संकल्प लिया और कहा भारत को विश्वगुरु बनाना है तो वेदों और वैदिक संस्कृति को ही अंगीकार करना पड़ेगा।
आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के उप प्रधान एवं आर्य समाज के प्रधान राजीव रंजन मिश्र ने वेद प्रचार के साथ संस्कृत शिक्षा शिविर संचालित कराने की बात कही। सीएसएन पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉक्टर बी डी शुक्ला, डॉ बी एस पांडेय, डॉ शीला पांडे, सुधा विद्यावाचस्पति व सरस्वती सदन अध्यक्ष अरुणेश बाजपेई ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा देश भर में महोपदेशक विमल कुमार आर्य को वेद प्रचार के लिए बुलाया जाना जनपद के लिए गौरव की बात है। कोषाध्यक्ष सुयश बाजपेई ने स्वागत किया और मंत्री सीमा मिश्रा ने आभार जताया। संचालन महेश मिश्रा ने किया।