हरदोई : बैंक यूनियंस की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ज़िले पर भी दिख रहा है ख़ासा असर

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ज़िले की करीब 150 बैंक शाखाओं में कारोबार रहा ठप्प
बैंकों के विलय के विरोध में बैंक यूनियंस का आज बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर जिले की बैंकों पर रहा। अधिकांश सरकारी बैंकों में गेट के ताले ही नहीं खुले। हड़ताली बैंककर्मियों ने भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर एकत्रित होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वाहन पर जिले की करीब 150 बैंक शाखाओं में बैंकिंग कारोबार पूरी तरह ठप्प रहा। स्टेट बैंक में प्रतिदिन होने वाली क्लीयरिंग से लेकर नकदी लेनदेन आदि न हो पाने से करीब 125 करोड़ का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के स्थानीय संयोजक आर के पाण्डेय ने बताया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों, बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक का विलय करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि बैंकों का यह विलय आवंछित है, यह ना तो यह अर्थव्यवस्था के लिए, ना बैंकों के लिए, ना ही बैंकों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं में, ना ग्राहकों के , ना ही उधार लेने वालों के लिए, ना ही कर्मचारियों और अधिकारिओं के लिए सहायक है।
बैंक यूनियंस फोरम के चेयरमैन मनोज सिंह ने कहा कि सरकार का कहना है कि विलय बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रस्तावित है पर ख़राब ऋण बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली मुख्य समस्या है। क्या कोई मान सकता है कि विलय के परिणामस्वरूप ख़राब ऋणों की वसूली होगी ? ज़ाहिर है नहीं। इसलिए यह भी गलत धारणा है।
बैंककर्मी नेता क्षितिज पाठक ने कहा कि हम दिन-रात परिश्रम करते हुए बैंकों की उन्नति के लिए कार्य कर रहे हैं सरकारी योजनाओं को सफल बनाने के लिए छुट्टियों के दिन भी बैंक अधिकारी कार्य करते है। बढते हुए परिचालन लाभ से NPA के कारण हो रहे घाटे को पूरा किया जा रहा है जिसके लिए बैंककर्मी कतई जिम्मेदार नहीं है।
बैंककर्मी नेता अजय मेहरोत्रा ने कहा कि बैंकों की 73 प्रतिशत पूंजी का लाभ केवल एक प्रतिशत उद्योगिक घराने उठा रहे है जो बैंकों से पैसा लेकर वापिस नहीं करते। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोग विदेश भाग जाते है जिनका सरकार कुछ नहीं बिगाड़ पाती।
महिला बैंककर्मी सूर्या बाथम ने कहा कि बढते हुए परिचालन लाभ से NPA के कारण हो रहे घाटे को पूरा किया जा रहा है जिसके लिए बैंककर्मी कतई जिम्मेदार नहीं है।
हालांकि पिछले दिनों लगातार छुट्टियों व हड़ताल के चलते लगातार बंद रही बैंकों से आम जनता बेहाल रही। कारोबारी दीपक कपूर आक्रोशित दिखे, कहा कि कल लास्ट डे है बेटी की फ़ीस जमा करने का और लगातार बंदी से एटीएम से भी पैसा नहीं निकल पा रहा है। इसके लिए उन्होंने बैंक प्रबंधन को जी भरके कोसा।
प्रदर्शनकारियों में आर के मिश्रा,वर्षा मेहरोत्रा, अनामिका सिंह, प्रिया रस्तोगी, रानी देवी, प्रियंका पाल, वैशाली, वेद प्रकाश पाण्डेय, अनूप सिंह, वीर बहादुर सिंह,पवन रस्तोगी, अभिनव सौरव, राजन शुक्ला, अभय, धर्म, एस के गोविल, शिव करन, रविन्द्र मिश्रा, सुशील कश्यप, देशदीपक, रामबाबू मिश्रा, नीतीश कुमार सिंह, सौरभ कनौजिया, वैशाली, हिमांशु श्रीवास्तव, पुनीत गुप्ता,प्रदीप, आशीष अवस्थी, विनोद मेहरोत्रा, सुरेश कनौजिया, सुशील कुमार, जलज बाजपाई, विवेक सिंह, अरुण मोहन पाल, गोविंद शुक्ल, दीपक पाठक, मोहम्मद आरिफ़, मनोज कुमार, अखिलेश वर्मा, हिमांशु सिंह, रोचिन सिन्हा, प्रकाश दुबे, दिनेश, अनुज सिंह, सत्यपाल यादव, अजातशत्रु, रिजवान, चंद्रशेखर, विशाल सिंह, अनादि ब्रम्ह, श्याम मोहन बाजपेई, विनोद माहेश्वरी शामिल रहे।