हरदोई : बोलीं मंजू; सरकारी विद्यालयों में समर हॉलिडे होमवर्क का चलन रहा असरकारी’ 100 प्रतिशत उपस्थिति पुरस्कार से भी बच्चों में स्कूल आने की दिखी ललक

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हाल ही में प्रदेश सरकार ने शिक्षिका मंजू वर्मा को सम्मानित किया। मंजू जी उच्च प्राथमिक विद्यालय बरहा वि.ख. सुरसा, जनपद-हरदोई में प्रधान अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। इस विद्यालय में उनकी नियुक्ति विज्ञान शिक्षिका के रूप में 18 दिसंबर 2012 में हुई। विद्यालय में बाउंड्री वॉल न होने से स्थानीय लोगों व जानवरों का आवागमन होता रहता था। विद्यालय में मूलभूत वस्तुओं का भी अभाव था। पहले प्रधानाध्यापक से बाउंड्रीवाल के लिए प्रार्थना पत्र देने के लिए उन्होंने निवेदन किया, जब बाउंड्री वॉल हो गयी फिर निजी व्यय से पेड़-पौधे लगाए। जिन कमरों में कबाड़ भरा हुआ था उनकी सफाई की। अभिलेखों को सुव्यवस्थित रखवाया। विद्यालय में प्रार्थना- सभा व्यवस्थित कराई। प्रार्थना में अखबार पढ़ना, सुविचार, सामान्य ज्ञान व दैनिक पीटी, योगा प्रारंभ कराया। छात्र/छात्राओं को सुव्यवस्थित एवं अनुशासित करने के लिए उन्हें टाई -बेल्ट व आई-कार्ड वितरित किए। छात्र/छात्राओं के बीच से चुनकर स्कूल कैप्टन व वाइस कैप्टन और मॉनिटर बनाये, उन्हें बैज बनवाकर दिए। नियमित रूप से समय विभाजन चक्र के माध्यम से पढ़ाई की शुरुआत की जिसमें समस्त स्टाफ ने उनका सहयोग किया।
मंजू जी ने नामांकन व ठहराव हेतु अभिभावकों से सम्पर्क किया, माता अभिभावकों की बैठक प्रारम्भ की। कक्षाओं में सुंदर व आकर्षक वॉल-पेंटिंग व व्हाइट बोर्ड की व्यवस्था की। समर हॉलिडे होमवर्क का चलन डाला। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन राष्ट्रीय पर्वों पर कराना शुरू किया। विज्ञान लैब का उपयोग कर शिक्षण को रुचिकर बनाया। साक्षरता, मतदान, स्वच्छता जागरूकता, जल संरक्षण, बालिकाओं की शिक्षा आदि हेतु शपथ दिलवाई व रैली निकलवाकर समुदाय को जागरूक किया। बच्चों व समुदाय को पौधारोपण के प्रति जागरूक कर उनसे पौधे रोपित करवाए। विभिन्न “विशेष दिवसों” की जानकारी बच्चों को दी। उन्होंने ‘नो बैग डे’ पर कबाड़ से उपयोगी समान बच्चों से बनवाया। बालिकाओं को सिलाई-कढ़ाई की जानकारी दी। “मीना मंच” का गठन कर उसे समय-समय पर आयोजित कराया। विज्ञान प्रदर्शनी लोक कल्याण मेले व अन्य स्थानों पर शैक्षिक कार्यक्रमों में बच्चों का प्रतिभाग सुनिश्चित किया। प्रत्येक माह लगातार उपस्थित होने वाले बच्चों को प्रोत्साहन पुरस्कार दिए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सुलेख, मानचित्र आदि प्रतियोगिताओं में ब्लॉक स्तर, जिला स्तर, मण्डल स्तर पर बच्चों को प्रतिभाग कराके प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान हासिल करवाए। उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पुरस्कार घोषित किए, जैसे कि 100 प्रतिशत उपस्थित पुरस्कार, स्टार स्टूडेंट, माता अभिभावक पुरस्कार, जिसके परिणाम बहुत ही अच्छे आ रहे हैं। उनका कहना है कि विद्यालय प्रबंधन समिति का भी समुचित सहयोग प्राप्त हो रहा है जिससे बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है।

शिक्षिका मंजू वर्मा से प्रधान संपादक कुलदीप द्विवेदी की ख़ास बातचीत आज ‘फेस टु फेस’ में,

प्रश्न – शिक्षा विभाग में आप जाना पहचाना नाम हैं, हमारे नए पाठकों के लिए कृपया आप अपना परिचय ज़रूर दे दें, शिक्षा आदि कहाँ से प्राप्त की, परिवार के बारे में, व अपनी अभिरुचियाँ ज़रूर बताएं।
उत्तर- मेरा नाम मंजू वर्मा है, मैं बेसिक शिक्षा परिषद में शिक्षिका हूँ। मेरी प्रारम्भिक शिक्षा मेरे गाँव के प्राथमिक विद्यालय में हुई। मैंने आर्यकन्या पाठशाला, हरदोई से हाईस्कूल व इण्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की और स्नातक राजकीय महाविद्यालय हरदोई से किया।
मेरा शिक्षा विभाग में आने का पूरा श्रेय मेरे पिताजी श्री राम नरेश वर्मा जी ( वरिष्ठ लेखाधिकारी BSNL) को जाता है। मेरे परिवार में माता-पिता,तीन बहनें और एक भाई है। मेरा एक पुत्र अभय सिंह है जो कि कक्षा 8 में अध्ययनरत है। मेरी रुचि पढ़ने-पढ़ाने, पेंटिंग, क्राफ्ट,बागवानी और बैडमिंटन खेलने में है।
प्रश्न – कितने वर्षों से आप शिक्षण कार्य कर रही हैं ? वर्तमान में कहां कार्यरत हैं?
उत्तर – शिक्षा विभाग में मुझे लगभग 15 वर्ष हो गये हैं। वर्तमान में मैं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरहा, ब्लॉक-सुरसा,जनपद-हरदोई में इंचार्ज प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ।
प्रश्न – आज जब लोग स्वार्थी हो गए हैं, आप दिन रात एक करके दिशाहीन शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटी हैं, इसके पीछे कोई विशेष प्रेरणा है?
उत्तर – मैंने हमेशा से ही बच्चों को अच्छी शिक्षा व उनको प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। मेरे प्रेरणा स्रोत मेरे माता-पिता के साथ सुरसा ब्लॉक में रह चुकी खण्ड शिक्षा अधिकारी, सण्डीला की आदरणीय श्रीमती सांत्वना शुक्ला जी हैं, जिन्होंने मुझे शिक्षा के साथ- साथ अन्य क्षेत्रों (सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद आदि) में बच्चों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी, सहयोग व प्रोत्साहित किया तब मैंने निश्चय किया कि, “”कठिनाइयों के डर से असफलता का भय मन में यूँ न लाइये, काम क्यों न होगा पूर्ण ? पहले कदम तो बढ़ाइए”, और आगे बढ़ी।
प्रश्न – आपके प्रयासों से विद्यालय में क्या गुणोत्तर सुधार आये हैं?
उत्तर- मेरे व विद्यालय के सभी साथियों के अथक प्रयासों से शिक्षा के साथ -साथ खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ब्लॉक, जिले स्तर पर अनेकों पुरस्कार प्राप्त कर मेरे विद्यार्थियों ने विद्यालय का नाम रोशन किया।
प्रश्न – साथी शिक्षक साथियों का आपके कार्यों के प्रति क्या नज़रिया है?
उत्तर – बहुत ही सकारात्मक नज़रिया है हम सभी एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं।
प्रश्न – क्या आपको लगता है, माहौल बदल रहा है और शिक्षकों की नई पौध गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देना चाह रही है?
उत्तर – जी हाँ! बिल्कुल माहौल तेज़ी से बदल रहा है। आज हमारे बहुत से शिक्षक भाई-बहन हैं जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का हर सम्भव प्रयास कर रहे हैं।
प्रश्न – आप जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से जुड़ी हैं? आपका संघ इस दिशा में क्या कार्य कर रहा है?
उत्तर – हाँ, मैं जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से जुड़ी हूँ, संघ के सभी पदाधिकारी अपने-अपने विद्यालय में अच्छी शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं साथ ही संघ हम शिक्षकों की समस्याओं को समय-समय पर सरकार तक पहुँचाता है, संघ हमेशा शिक्षक हित के लिए कार्यरत रहता है।
प्रश्न – शिक्षा विभाग के अधिकारियों का क्या सपोर्ट रहता है?
उत्तर – शिक्षा विभाग के अधिकारियों का समुचित सहयोग मिलता रहता है।
प्रश्न – आप क्या संदेश देंगी शिक्षक साथियों को ?
उत्तर – अंत में बस यही कहना चाहती हूँ कि,”बच्चों को एक उचित वातावरण प्रदान करना हम सभी का दायित्व है। उनका सर्वांगीण विकास हो इसके लिए ज़रूरी है कि हम उनके स्तर पर जाकर उन्हें ऊपर उठाएं और आगे बढ़ाएं। बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है,बस हमें उन्हें प्रोत्साहित करना है, कि,” वो कर सकते हैं हम उनके साथ हैं”।