हरदोई : फलाहार के 7 महीने पूर्ण होने पर नेचुरोपैथ डॉ राजेश ने बांटे अनुभव

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चिड़िया का बच्चा जब घोसले से बाहर निकल कर पहली बार बाहर की दुनिया देखता है तो क्या उसके मन में क्षण भर भी इसकी उलझन होती है कि वह अपनी भूख किस चीज से बुझायेगा? नैसर्गिक प्रवृत्ति उसे राह बताती है और वह बिना किसी परेशानी के अपनी खुराक पा जाता है। गाय और हिरण के बच्चे को हरी घास चाहिए। गिलहरी का बच्चा मीगी वाले फलों की तलाश करता है। विशेष बात यह है कि यह सारे जानवर जन्म से ही जहरीले पौधों और दूसरी हानिकारक चीजों से परहेज करते हैं।

शहीद उद्यान स्थित कायाकल्प केन्द्र के संस्थापक व नेचरोपैथ डॉ० राजेश मिश्र ने फलाहार के सात महीने पूरे होने पर बताया कि सैकड़ों बरसों से विज्ञान इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि मानव देह के पोषण के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता है परंतु अभी भी उसका ज्ञान अधूरा है जबकि हमारे प्राचीन ऋषियों ने मनुष्य के आहार के वारे में बिना अनुसंधान के ही सब कुछ जान लिया था।

डॉ० राजेश ने बताया कि स्वस्थ और सुखमय जीवन के लिए हमें केवल प्रकृति को अपने जीवन का पथ-प्रदर्शक मानकर उसी की आवाज का अनुसरण करना चाहिए। वे बताते हैं कि सात महीनों से वे ताजे फल और सूखे मेवों पर हैं। तीन माह से स्वस्थ गाय का दूध भी ले रहे हैं। बताया कि स्वास्थ्य रक्षा के लिए इससे अच्छा अन्य कोई आहार नहीं हो सकता।

डॉ० मिश्र ने कहा कि प्रकृति फल और सूखे मेवे स्वयं उत्पन्न करती है और मनुष्य का अधिक एहसान नहीं लेती जबकि गेहूं, धान, दालें और सब्जियां पैदा करने में अधिक परिश्रम करना पड़ता है। कहा फल,सूखे मेवे और जैविक तरीके से उत्पादित चीजें निरापद हैं जबकि रासायनिक उर्वरकों से पैदा किये गये खाद्यान्न मनुष्य को रोगी बना रहे हैं। कहा एक साल पूरा होने पर वे स्वास्थ्य रक्षा के लिए ‘आदर्श स्वास्थ्य नीति’ बनायेंगे। डॉ० राजेश ने पिछले साल 25 दिसम्बर से फलाहार प्रारंभ किया था जो एक वर्ष बाद 25 दिसम्बर को ही पूर्ण होगा।