6 दिसंबर को ज़िलाधिकारी कार्यालय के सामने हनुमान चालीसा व महाआरती करके कानून बनाने की करेंगे मांग

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आज प्रेस वार्ता का आयोजन राष्ट्रीय बजरंग दल नगर अध्यक्ष के आवास पर हुआ। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रांतीय महामंत्री अंकुर अवस्थी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि हिंदुत्ववादी चोला ओढ़कर सरकार राम भक्तों की भावनाओं से खेल रही है। वास्तव में हिंदूवादी सरकार होती तो 2014 में ही राम मंदिर निर्माण हो जाना चाहिए था। क्योंकि 70 वर्ष से अधिक समय से भूमि विवाद कोर्ट में चल रहा है। संघ और भाजपा ने मिलकर हिंदू समाज से कहा था कि हम पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर संसद में कानून बनाएंगे और राम मंदिर निर्माण करेंगे, जिसके लिए आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा भी निकाली थी और कहा था कि सोमनाथ की तर्ज पर ही राम मंदिर निर्माण हो सकता है। उन्होंने कहा कि पूछना चाहते हैं अब यह आंदोलन किसके विरोध में हो रहा है? सरकार के या कोर्ट के विरोध में धर्म सभा कर रहे हैं? क्या इससे कांग्रेस, सपा, बसपा को राम विरोधी दिखाना चाहते हैं! वह तो राम विरोधी हैं ही, उनके राम विरोधी होने से क्या आप हिंदूवादी हो जाएंगे? और अगर आप हिंदूवादी हैं तो राम मंदिर निर्माण के लिए अनशन पर बैठे स्वामी परमहंस को रात में जबरन उठाया क्यों गया? डॉक्टर प्रवीण भाई तोगड़िया, उद्धव ठाकरे के कार्यक्रम को अनुमति क्यों नहीं दी जाती है? उन्होंने दोहराया कि यह लक्षण सिर्फ राम विरोधियों के ही हो सकते हैं। इसलिए 6 दिसंबर को पूरे भारत में हर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने हनुमान चालीसा पाठ व महाआरती का आयोजन कर मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाने की मांग की जाएगी।
नगर प्रभारी देवब्रत मिश्रा ‘देवा’ ने कहा कि 2014 से पहले भाजपा को हिंदू व राम दिखाई देते थे मगर अब ना उन्हें हिंदू याद है ना ही राम का ध्यान है, उनको अब इंदौर की सैफी मस्जिद दिखाई दे रही है। उन्होंने चेताया कि सरकार यह समझ ले कि 2019 से पहले राम मंदिर नहीं तो हिंदुओं का वोट नहीं। नगर अध्यक्ष कपिल चतुर्वेदी ने कहा कि सालों से सत्ता पाने का साधन बना दिया है राम मंदिर को! उस परम पावन जन्म भूमि को चुनावी रण भूमि बना दिया है। वह प्रभु श्री राम जी करोड़ों हिंदुओं के आराध्य आज कटघरे में खड़े हैं, यह बात बहुत कष्टकारी है।
वार्ता में ईश्वर भगत सिंह नगर अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद, अंकुल गुप्ता भी मौजूद रहे।