हरदोई : स्कूल बस कंडक्टर की शर्मसार कर देने वाली करतूत के बाद उस पर लगाया गया पॉक्सो

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कल शहर में 1997 से सफ़लता पूर्वक संचालित, कक्षा 8 तक के अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय ‘क्रीसेंट एकेडेमी’ में शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया। स्कूल बस में महज 5 वर्ष की बच्ची के साथ छेड़छाड़ का मामला जब अभिभावकों के सामने आया तब उन्होंने आज़ाद नगर में रहने वाले बस कंडक्टर सुनील कुमार की मोहल्ले वालों के साथ मिलकर न केवल अच्छी तरह धुनाई की वरन उसे पुलिस को भी सौंप दिया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धारा 7, 8 में उसे हवालात में डाल दिया। प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 में पास हुआ था। इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।

स्कूल में किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था है? क्या मानकों को स्कूल पूर्ण कर रहा है? ऐसे कई सवालों के जवाब तलाशने अभिभावकों का संघ आज क्रीसेंट एकेडेमी पहुंचा। प्रबंधक पी के सिंह व प्रिंसिपल माला सिंह ने बातचीत के दौरान बताया कि वे इस घटना से काफी आहत हैं और इससे उनकी साख पर बट्टा लगा है। कंडक्टर का आइडेंटिटी प्रूफ़ तो उनके पास था लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन उन्होंने नहीं करा रखा था। हालांकि इसे उन्होंने अपनी चूक माना। 800 विद्यार्थियों की स्ट्रेंथ वाले स्कूल में 28 अध्यापकों/अध्यापिकाओं का स्टाफ़ है। जिन्हें ले आने व छोड़ने जाने के लिए 4 स्कूल बसें व 9 रिक्शों का प्रबन्धन किया गया है। बसों में जीपीआरएस सुविधाएं नहीं हैं। एक अतिरिक्त स्टाफ़ की कमी भी बसों में मानक पूरे करते हुए नहीं दिखाई दी। रिक्शों की बारीकी से जांच में पाया गया कि उनकी हालत काफी जर्जर है, और बच्चों के लिए अंदर दोनों तरफ बैठने के लिए लगे तख़्ते काफी कमज़ोर हो चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि मानक विहीन इन रिक्शों को किस तरह से विद्यालय प्रबंधन चला रहा है? हालांकि विद्यालय प्रबंधक अपने मुंह मे हुए कैंसर का हवाला देते हुए कहते हैं कि ख़ुद को अधिक समय देने के कारण प्रबन्धन में ऐसी खामियां आ गई हैं, इसे अतिशीघ्र दुरुस्त कर लिया जाएगा।

रेयान स्कूल में हुए हादसे के बाद सीबीएसई ने स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न केवल स्कूलों के लिए बल्कि माता-पिता और राज्य सरकारों के लिए भी यह देखना ज़रूरी है कि इन दिशा-निर्देशों का ठीक तरह से पालन हो रहा है या नहीं। इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि ये प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है कि वह ऐसे वातावरण में अध्ययन करे जहां वह सुरक्षित अनुभव करे और किसी भी प्रकार की शारीरिक या भावनात्मक प्रताड़ना से स्वतंत्र हो। बहरहाल इस मुद्दे पर अभिभावकों का संघ कल डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट को ज्ञापन देने का मन बना चुका है। विद्यालय प्रबंधन से मिलने पहुंचे पदाधिकारियों में संरक्षक शिव प्रकाश त्रिवेदी, अध्यक्ष गोपाल द्विवेदी, महासचिव दानिश किरमानी, उपाध्यक्ष कुलदीप द्विवेदी व आंनद गुप्ता, कोषाध्यक्ष अमिताभ शुक्ला थे।