जेके पब्लिक स्कूल के बच्चों ने ड्रम बीट पर की कदम ताल, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर दिया सम्यक संदेश

अंतर्ध्वनि डेस्क
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ज़रा सोचो तो सही जब घर में बेटी आंगन में किलकारी नहीं भरेगी, तो कहां से आएंगी बुआ और मौसी! ये अहसास शहर के जेके पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की बालिकाओं ने राहगीरों को कराया। इसके लिए उन्होंने नुक्कड़ नाटक, रोड शो व मार्चपास्ट का रास्ता अपनाया। मौक़ा था ‘नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे’ का।

आवास विकास कॉलोनी स्थित अपने स्कूल परिसर से इवेंट ऑर्गेनाइजर शिक्षक मारियो विंसन की अगुवाई में बालिकाएं सड़क पर आईं। उन्होंने नारा बुलंद किया कि बेटों की तरह बेटियां भी घर के सब काम करती हैं, फिर भी उनकी अनदेखी की जाती है! बालिकाओं द्वारा मंचित नाटक में डॉक्टर का किरदार निभा रही पारुल त्रिपाठी ने सवाल किया कि आखिर क्यों आज भी बेटी को घर की दहलीज में कैद रहने को मजबूर किया जाता है? क्यों उनके लिए सड़क के फुटपाथ सुरक्षित नहीं है? बच्चों ने बार-बार चेतावनी भरे लहजे में कहा ‘सुनो सुनो एक बात सुनो, सब जन मिलकर आगे आओ, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ।’ टीचर की भूमिका में रहे प्रांजलि सिंह ने आगाह किया कि घर में उनको काली, दुर्गा और कात्यायनी का स्वरूप बताया जाता है किंतु घर के बाहर उनको असमानता का दंश झेलना होता है। उन्होंने सवाल किया, ‘वह दिन कब आएगा जब उनको बराबरी का दर्जा मिलेगा?’ दादी बनीं दिव्यांशी ने संदेश दिया कि बेटी को पढ़ने के लिए घर के बाहर भेजोगे तो ही बढ़ेगी। पोती बनी विदिता को नाटक के ज़रिए प्रोत्साहन मिला।

यहां ज़िक्र आया प्रतिभा पाटिल का तो आयरन लेडी इंदिरा गांधी व कल्पना चावला की भी चर्चा हुई। छात्राओं में से किसी ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनेंगी तो किसी ने पायलट, टीचर व डॉक्टर बनने के लिए कहा। बालिकाओं की आसमान में तनी हुई मुट्ठियाँ चेहरे पर आक्रोश व गगनभेदी नारों ने गुरुवार को सड़क पर गुज़रते गए राहगीरों को ठिठकने के लिए मजबूर कर दिया। जब स्कूल के बच्चे सड़क पर आए तो राहगीरों के कदम थम गए। बाइक सवारों ने ब्रेक लगाकर अपने पांव ज़मीन पर टिका दिए। बालिकाओं का हुजूम अनुशासित तरीके से ड्रम बीट पर कदम ताल मिलाते हुए जेके पब्लिक स्कूल से राम जानकी मंदिर, लखनऊ चुंगी, सिनेमा चौराहा से सिनेमा रोड होते हुए बड़ा चौराहा पहुंचा। ड्रम की बीट देकर नारा लगाया कि नौबत अस्तित्व बचाने की है।

हेड गर्ल दीपिका अवस्थी, श्रुति गुप्ता, कृति श्रीवास्तव, विधि चौहान, प्रांजलि, अंशिका वर्मा, संस्कृति पाठक, पलक चंदेल, संजल गुप्ता, तनिषा मिश्रा, प्रांशिता सिंह, आकांक्षा वर्मा, दीपशिखा वर्मा, शालिनी सिंह, अनिशा कुमारी, सृष्टि शुक्ला, प्रशांत मिश्रा, अभय प्रताप सिंह, आशीष वर्मा आदि बच्चों का कार्यक्रम में सराहनीय योगदान रहा। शिक्षक मारियो विंसन, संदीप सिंह, नित्यानंद द्विवेदी, शेजल दास, शिवा मिश्रा व शिक्षिका प्रीति सिंह, दीपा सिंह व आकांक्षा शुक्ला प्रमुख रूप से शामिल रहे।