क्या बीजेपी का ये दाँव विपक्ष को कर देगा चारों खाने चित्त??!

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एक शहर, एक जगह, एक मंच और एक ही समय। वोट की जुगाड़ में बीजेपी ने पिछडी जातियों के 21 सम्मेलन कर लिए। अब इरादा यूपी के हर जिले में ऐसी बैठकें करने का है।
बीजेपी की तैयारी पिछड़ी जातियों के बूते नरेन्द्र मोदी को फिर से पीएम बनाने की है। इसीलिए सीएम, डिप्टी सीएम से लेकर पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता इस बिरादरी को दुलारने में लगा है। सरकार से लेकर संगठन में हर जाति को मलाई देने का वादा भी किया गया। मोदी भी कई रैलियों में अपने को पिछड़ी बिरादरी का बता चुके हैं।
बीजेपी के मुक़ाबले में समाजवादी पार्टी ने भी हर जिले में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन करने का फ़ैसला किया है। यूपी में इस बिरादरी के क़रीब 54 प्रतिशत वोटर हैं।
यूपी में चुनाव के नतीजे जातियों के गुणा भाग से तय होते हैं। पिछड़ी जातियों की आबादी सबसे अधिक है इसीलिए हर पार्टी इसी बिरादरी के वोट पर नज़र गड़ाए रहती है। पिछले लोकसभा और राज्य के विधान सभा चुनावों में पिछड़ी जातियों ने बीजेपी को झूम कर वोट किया था। इसीलिए दिल्ली से लेकर लखनऊ तक में पार्टी की सरकार बन गई।
यूपी में बीएसपी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन की आहट ने बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और बीजेपी अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पांडे अगड़ी जाति के हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बात पर बार बार चुटकी भी लेते रहते हैं। वे कहते हैं पिछड़ों का वोट लेकर किसी और को मुख्य मंत्री बना दिया बीजेपी वालों ने। पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर पिछड़ी जाति के वोटरों को ‘अपना’ बनाये रखने के लिए होमवर्क शुरू हुआ। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को इसकी ज़िम्मेदारी दी गई। तय हुआ सबसे पहले इस समाज के लोगों के मन की बात सुनी जाये।
लखनऊ में अलग अलग जाति के लोगों को बुला कर उनसे संवाद बनाने का सिलसिला शुरू हुआ। फ़ैसला हुआ कि कुछ उनकी सुनेंगे और कुछ अपनी सुनायेंगे। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ख़ुद इस कार्यक्रम के आयोजक बन गए। 40 पिछड़ी जातियों के 21 सम्मेलन कराने पर आम सहमति बनी। जिस जाति की बैठक लखनऊ में हुई उस जाति के कम से कम दस लोग हर जिले से बुलाये गए। बीजेपी में संगठन के लिहाज़ से 92 जिले हैं।
इन सब नेताओं को लखनऊ लाने, ठहराने और आव भगत की ज़िम्मेदारी ख़ुद केशव मौर्य और उनकी टीम ने सँभाली। वे सभी सम्मेलनों में हाज़िर रहे, हाथ जोड़ कर एक मेज़बान की तरह। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ भी कई बैठकों में मौजूद रहे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पांडे भी दर्जन भर सम्मेलनों में मंच पर रहे। जिस जाति का सम्मेलन होता था, उस बिरादरी के मंत्री और बीजेपी के नेताओं को भी बुलाया गया।
बीजेपी का पहला जाति सम्मेलन 7 अगस्त को हुआ। आख़िरी मीटिंग 24 सितंबर को हुई। जिन सम्मेलनों की राजनैतिक गलियारों में ख़ास चर्चा रही, उनका ब्यौरा नीचे है।
प्रजापति सम्मेलन – 7 अगस्त
राजभर सम्मेलन – 8 अगस्त
विश्व कर्मा सम्मेलन – 31 अगस्त
पाल बघेल सम्मेलन – 1 सितंबर
लोधी सम्मेलन – 5 सितंबर
निषाद सम्मेलन – 7 सितंबर
चौरसिया सम्मेलन – 14 सितंबर
यादव सम्मेलन – 15 सितंबर
जाट सम्मेलन – 18 सितंबर
कुर्मी पटेल सम्मेलन – 20 सितंबर
गुर्जर सम्मेलन – 23 सितंबर
डेढ़ साली पुरानी योगी सरकार में पहली बार पिछड़े समाज के नेताओं को अपनी बात कहने का मौक़ा मिला तो सबने अपनी भड़ास निकाली। वैसे भी लोकसभा चुनाव का माहौल बनने लगा है। सियासी तवा गर्म है तो वादों और इरादों की रोटियॉं सेंकी ही जायेंगी। बीजेपी की जातिगत वाली बैठकों में ऐसा हुआ भी।
जाट बिरादरी के सम्मेलन में पीएम नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर भी वादे पूरे न करने के आरोप लगे। बीजेपी सांसद चौधरी बाबूलाल ने जाट आरक्षण का मुद्दा फिर से उठाया. गुर्जर समाज की मीटिंग में इस जाति से किसी को भी योगी सरकार में मंत्री न बनाने पर सवाल हुए। पार्टी के विधायक अवतार सिंह भडाना ने कहा बिरादरी का अपमान है।
प्रजापति और निषाद जाति के सम्मेलनों में भी सवाल हुए। सबका जवाब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी सबको उचित सम्मान देगी। ये सरकार पिछड़ी जाति के लोगों ने बनाई है और उनकी ही रहेगी। बीजेपी की योजना ही ये जानने की थी कि पिछड़ी जाति के नेता पार्टी और सरकार को लेकर क्या सोचते हैं ?
इस फ़ीडबैक के सहारे बीजेपी लोकसभा चुनाव की तैयारी करना चाहती है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कहते हैं बीजेपी की पहचान अब बदल गई है। अब ये पिछड़ी जाति के लोगों की पार्टी बन गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ भी कहते हैं ये समाज ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
एक तरह ये ये बात सही भी है। कभी बीएसपी के लिए स्टेपनी वोट बैंक रहा पिछड़ी जातियों का समूह अब बीजेपी के साथ है। यही हाल समाजवादी पार्टी की भी है। पिछड़ों के नाम पर सिर्फ़ यादव का ही साथ रह गया है। एक दौर था जब प्रजापति, पटेल और शाक्य जैसी बिरादरी समाजवादी पार्टी का झंडा ढोया करते थे।
बीजेपी नेता नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि जिन नेताओं को सम्मेलन में बुलाया गया था, अब उन्हें अपने अपने इलाक़ों में अपनी ही बिरादरी की मीटिंग करने को कहा गया है। ये सिलसिला चुनाव तक चलेगा। बीजेपी के जातीय सम्मेलनों ने विपक्षी खेमे के लिए ख़तरे की घंटी बजा दी है।
अखिलेश यादव ने इस ख़तरे को भाँपते हुए यूपी के सभी 75 जिलों में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन करने का एलान कर दिया है। मायावती ने भी बीएसपी नेताओं को बूथ कमेटियों में इस बिरादरी के लोगों को सदस्य बनाने का आदेश दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले पिछड़ी जाति के वोटरों को जुटाने के लिए पार्टियों में होड़ मची है।