भाजपा इस लोकसभा चुनाव में भी पिछली बार की तरह प्रचंड बहुमत पाने के लिएजी जान से जुटी है तो विपक्ष भी एकजुट होकर उसे सत्ता से बेदखल करने की कवायद में जुटा है। कुल मिलाकर यह चुनाव मोदी बनाम विपक्ष नजर आ रहा है। भाजपा इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को लेकर मैदान में उतर रही है।

जबकि विपक्ष एकजुट तो है लेकिन मोदी के मुकाबले के लिए कोई चेहरा पेश नहीं कर पाया है। ऐसे में लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां पिछले चुनाव से एकदम भिन्न हैं। वर्ष 2014 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ था तब यूपीए को सत्ता में दस साल हो रहे थे। भ्रष्टाचार एवं अन्य कारणों के चलते सत्ता विरोधी लहर चल पड़ी थी।

भाजपा को यूपीए के प्रति नाराजगी और सत्ता से बाहर होने की सहानुभूति का लाभ मिला। उसने राष्ट्रीय स्तर पर उभर रही नरेंद्र मोदी की छवि को भी पूरे देश में भुनाया और 30 साल के बाद कोई पार्टी (भाजपा) स्पष्ट बहुमत लेकर सरकार बनाने में सफल रही। लेकिन अब राजनीतिक स्थितियां काफी बदली हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि गुजरात, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में सारी सीटें जीतना भी आसान नहीं है।