मंदसौर के बालिका कुकर्म केस के दोनों आरोपियों को फांसी की सज़ा

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मात्र 56 दिन में आया फैसला

मंदसौर की विशेष न्यायाधीश, पास्को एक्ट श्रीमती निशा गुप्ता ने आज मंदसौर में 8 वर्षीय बच्ची के साथ कुकर्म कर मारने का प्रयास करने के बहुचर्चित मामले के दोनो आरोपियों इरफान (24 साल), और आसिफ़ (20 साल) को दोषी करार देकर फांसी की सज़ा सुना दी है।
आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास और अर्थ दण्ड की सज़ा भी सुनाई गई है।
विशेष लोक अभियोजक बापू सिंह ठाकुर के अनुसार मंदसौर में 26 जूंन 2018 को एक 8 वर्षीय स्कूली छात्रा के साथ बरगलाकर कुकर्म करने के बाद उसकी हत्या का प्रयास किया गया किंतु भाग्य से बालिका बच गई। गम्भीर रूप से घायल बच्ची का इंदौर एम वाय अस्पताल में उपचार जारी है।
इस प्रकरण को लेकर पुलिस ने सक्रियतापूर्वक कार्यवाही कर 29 जूंन को मंदसौर के मदार पुरा निवासी इरफान मेवाती और उसके साथी आसिफ मेवाती को गिरफ्तार किया था। दोनो आरोपियों के विरुद्ध 12 जुलाई को पुलिस ने 350 पेज का चालान पेश किया था और 18 जुलाई को आरोप तय हुए जिससे दोनों आरोपियों ने इंकार किया था।
प्रकरण में 30 जुलाई से अभियोजन साक्ष्य शुरू हुई जो 8 अगस्त तक चली।बइसमें 37 गवाह प्रस्तुत किये गए।बालिका ने भी आरोपियों की शिनाख्त की थी। अन्य साक्ष्य भी सामने रखे गए। बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस जाँच को दूषित बताया था। मामले में 12 अगस्त को बहस पूर्ण हुई थी और 21 अगस्त फैसले के लिए नियत की गई थी।

आज दिनांक 21 मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के साथ दोनो आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया जहाँ पहले न्यायाधीश श्रीमती गुप्ता ने आरोपियों को दोषी करार दिया और दोपहर बाद सज़ा सुनाई।

जानकारी के अनुसार दोनो आरोपियों को भादस की धारा 363 के तहत 7 साल के कारावास और 10 हजार अर्थ दण्ड, धारा 366 के तहत 10 साल के कारावास और 10 हज़ार अर्थ दण्ड, धारा 307 के अंतर्गत आजीवन कारावास एवम् 10 हज़ार अर्थ दण्ड तथा धारा 376 डी बी के तहत फाँसी की सज़ा सुनाई गई है।
इस बहुचर्चित मामले के निर्णय को सुनने के लिए अदालत के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे। फैसला आने के बाद पीड़िता के परिजनों ने संतोष जताते हुए कहा है दोषियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाना चाहिए ताकि कोई इस प्रकार के अपराध करने से डरे।