हरदोई की सुप्रिया की मौत पर बड़ा सवाल : आख़िर ज़िम्मेदार कौन ??

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सुप्रिया की मौत का मामला : कलेक्टर जवाबदेही थोप रहे अदने अफ़सर पर
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर विश्व रिकॉर्ड की ख़ातिर हुआ ज़ुबानी खर्च
आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त आक्रोश, योगी और शासन के आला अफ़सरों से शिकायत
बृजेश ‘कबीर’
हरदोई : ज़िलाधिकारी पुलकित खरे ने विश्व बालिका दिवस पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की थीम पर एक साथ एक जगह पर 11 हजार छात्राओं द्वारा पेंटिंग्स और स्लोगन प्रदर्शित करने का ताना-बाना बुना था। उनकी मंशा आयोजन को गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज करवाने की थी। हालांकि, इसके लिए लिखा-पढ़ी में कोई ख़ास तैयारी नहीं की गई थी। इस आयोजन के सिलसिले में डीएम खरे द्वारा ज़िला विद्यालय निरीक्षक वीके दुबे और बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमन्त राव को मौखिक दिशा-निर्देश दिए गए थे। दुबे ने डिग्री व इण्टर कॉलेजों और राव ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के प्रशासन को छात्राओं को ज़िला मुख्यालय पर राजकीय इण्टर कॉलेज मैदान में लाने का निर्देश दिया था। यह सब 24 घण्टे के अल्टीमेटम पर हुआ।
गुरुवार सुबह 09 बजे छात्राएं ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की थीम पर तैयार पेंटिंग्स व स्लोगन लिखी तख्तियां ले कर जीआईसी ग्राउण्ड पहुंच गईं। प्रशासनिक दावे के अनुसार मैदान में ज़िले भर से 11 हज़ार छात्राएं एकत्र हुई थीं। इतनी बड़ी तादाद में छात्राओं को जुटाने के बावज़ूद मैदान में ना तो छाया का बन्दोबस्त किया गया था और ना ही पेयजल की समुचित व्यवस्था थी। पेयजल के नाम पर नगर पालिका परिषद से पानी के 02 टैंकर मंगा कर खड़े करवाए गए थे। इतनी बड़ी तादाद में छात्राओं के जमावड़े के बाद भी सुरक्षा व चिकित्सा के भी ख़ास इंतज़ाम नहीं थे। इसकी वजह ये कि पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी समय रहते आयोजन के बारे में इत्तला नहीं थी। बदइंतज़ामी के इस आलम के गम्भीर परिणाम आने थे और आए। तेज़ धूप बर्दाश्त नहीं कर पाने से एक टीचर और छात्रा गश खा गईं। 05 घण्टे बाद आयोजन के समापन के दौरान मैदान में आवारा जानवर घुस आने से भगदड़ मच गई। कार्यक्रम स्थल से निकल रहीं आर्य कन्या इण्टर कॉलेज में 07वीं की छात्रा प्रीति, वेणी माधव विद्यापीठ इण्टर कॉलेज में 09वीं की छात्रा आस्था सिंह और श्रीराम सुभाष चन्द्र डिग्री कॉलेज कहली में बीटीसी की छात्रा पूजा चुटहिल हो गईं। तीनों को पुलिस ने एम्बुलेन्स से ज़िला अस्पताल भेजा।
बहरहाल, रात होते होते एक मासूम आयोजन की बदइंतज़ामी की भेंट चढ़ गई। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद घर पहुंची आर्य कन्या इण्टर कॉलेज (पिहानी चुंगी शाखा) में 09वीं की छात्रा सुप्रिया शर्मा पुत्री नरेन्द्र शर्मा निवासी प्रगति नगर की तबियत बिगड़ गई। हालत गम्भीर होने पर परिजन देर रात सुप्रिया को लेकर ज़िला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण तेज़ बुखार और डायरिया बताया गया। इस घटना के बाद ज़िला प्रशासन सोशल मीडिया के निशाने पर आ गया। आयोजन में बदइंतज़ामी से लेकर रिकॉर्ड दर्ज़ करने वाली संस्था की वैधता पर सवाल खड़े किए जाने लगे। शुक्रवार सुबह पत्रकारों ने डीएम खरे से इस बाबत स्पष्टीकरण चाहा तो उन्होंने बीएसए राव को आगे कर दिया। इस तथ्य के बावज़ूद कि सुप्रिया इण्टर कॉलेज की छात्रा थी और इसलिए प्रकरण से राव का कोई सरोकार नहीं था। बहरहाल, बीएसए राव ने कहा, इंतज़ामों में कोई कमी नहीं थी। छात्रा की मौत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। वहीं, सुप्रिया के पिता का कहना है कि आयोजन में जाने से पूर्व बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और वापस आने के बाद उसकी हालत बिगड़ी। फ़िलवक्त, सुप्रिया की मौत को लेकर अभी तक किसी ज़िम्मेदार की ज़िम्मेदारी तय नहीं हो सकी है और सुप्रिया के घर वालों के कलेजे से हूक उठ रही है।
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सण्डीला के आशीष गौड़ ने मामले को पहुंचाया शासन/सत्ता की दर
सुप्रिया की असमय मौत को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश सामने आया। यूज़र्स ने मासूम की ज़िन्दगी के मूल्य पर रिकॉर्ड के औचित्य पर कई प्रश्न खड़े किए। वहीं, इससे इतर सण्डीला निवासी लखनऊ के युवा कारोबारी आशीष गौड़ ने हरदोई ज़िला प्रशासन के विरुद्ध मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ और सचिव/अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। आशीष ने पूरे मामले को लेकर ज़िला प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
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क्या रिकॉर्ड दर्ज़ करने वाली संस्था वैध है?
आयोजन हुआ तो पर्यवेक्षण के लिए कोई यूरेशिया एण्ड इण्डिया रिकॉर्ड्स के जगदीश पिल्लई आयोजन स्थल पहुंचे। उन्होंने आयोजन को चार वर्गों में यूरेशिया एण्ड इण्डिया रिकॉर्ड्स में दर्ज़ किए जाने की घोषणा की। सवाल आज सोशल मीडिया के माध्यम से संस्था की वैधता पर भी लगाए गए। गूगल करने पर ऐसी किसी संस्था के बारे में जानकारी नहीं मिली। डीएम पुलकित खरे ने आयोजन बालिका सशक्तिकरण के क्रम में आयोजित किए जाने और गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज़ कराए जाने का प्रयास करने की बात कही थी। सवाल है, आयोजन जब इतनी प्रतिष्ठित संस्था में दर्ज़ होने की बात प्रचारित की गई थी, तब इतनी सतही व्यवस्थाएं क्यों की गईं ? क्यों महज 24 घण्टे के अल्टीमेटम पर शैक्षिणक संस्थानों को आयोजन के बाबत सूचित किया गया ??? क्यों छाया, पेयजल, स्वल्पाहार, स्वास्थ्य और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं की गई ?
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…और शास्त्री उवाच
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ भाजपा-नीत केन्द्र सरकार के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का दिया नारा है। लिहाजा, सुप्रिया की मौत के प्रकरण में जब भाजपा ज़िलाध्यक्ष श्री कृष्ण शास्त्री की प्रतिक्रिया चाही गई तो किसी भी विषय पर विस्तृत वक्तव्य देने वाले शास्त्री ने महज डेढ़ लाइन में बात ख़त्म कर दी। ज़िला प्रशासन की संवेदनहीनता पर सीधे कुछ नहीं कहते हुए बोले, बड़े आयोजन की व्यवस्थाएं संवेदना के साथ होनी चाहिए। कल, सुप्रिया के परिजनों से भेंट करूंगा। अलबत्ता, भाजपा के एक उपाध्यक्ष और महामन्त्री ने डीएम खरे पर प्रशासनिक दायित्वों को पूरा नहीं करने और लोक-हित की फाइलों को लटकाए रखने का आरोप लगाया।
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लोक-हित की सैकड़ों फाइलें अटकी-लटकी हैं, कलेक्टर साहिब के दफ़्तर में और निजी उपलब्धि के लिए बहुत कुछ हो रहा है, इस हद तक कि एक मासूम इस ज़िद की भेंट हो गई, ऐसे में बेकल उत्साही की दो पंक्तियां और बात ख़त्म, कल भाजपा ज़िलाध्यक्ष शास्त्री की सुप्रिया के परिजनों से मुलाक़ात तक…
न जाने कौन सा नश्शा है उन पे छाया हुआ,
क़दम कहीं पे हैं पड़ते कहीं पे चलते हैं।