यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान ‘मी टू’ का मज़ाक बनाया अमेरिकी राष्ट्रपति ने

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ चल रहे ‘मी टू’ अभियान का मजाक बनाते हुए कहा कि इस अभियान के तहत प्रेस द्वारा लागू किए जा रहे नियमों के कारण उन्हें खुद पर नियंत्रण रखना पड़ रहा है। ट्रंप ने पेन्सिलवेनिया में मध्यावधि चुनाव से जुड़ी एक रैली के दौरान ‘द गर्ल दैट गॉट अवे’ मुहावरे की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘एक मुहावरा है, लेकिन ‘मी टू’ के नियमों के तहत मुझे अब उस मुहावरे का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। मैं ऐसा नहीं कर सकता।’’
‘द गर्ल दैट गॉट अवे’ मुहावरे का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए होता है जिसने कभी आपसे प्रेम किया था और फिर आपको छोड़कर चला गया। लेकिन आप अभी तक उस व्यक्ति से प्रेम करते हैं और उसे याद करते हैं। मीडिया की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कहा कि मीडिया को छोड़कर बाकी सबके लिये वह ‘पुराने और वास्तविक’ मुहावरे का ही प्रयोग करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘वहां जो लोग मौजूद हैं उन्हें छोड़कर बाकी के लिये मैं इसका ही इस्तेमाल करुंगा। वो लोग कहेंगे, सुना आपने राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा? आपने सुना कि उन्होंने क्या कहा?’’
आपको जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन साल 1978 से 2013 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर कम से कम 23 महिलाओं ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। वहीं, 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वोटिंग से ठीक पहले ट्रंप का एक पुराना रेडियो इंटरव्यू सामने आया था जिसमें उन्होंने एक महिला को उसके प्राइवेट पार्ट्स से पकड़ लेने की बात को शेखी बघारते हुए इंटरव्यू लेने वाले को बताया था।
वहीं, उन्होंने ब्रेट कैवनाग नाम के जिस व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने के लिए नॉमिनेट किया था उनके खिलाफ उनके साथ हाई स्कूल में पढ़ने वाली एक महिला ने सामने आकर यौन हिंसा के आरोप लगाए। बावजूद इसके ट्रंप अड़े रहे और कैवनाग को सुप्रीम कोर्ट का जज बनवाकर ही दम लिया। ऐसी बातों के बाद मी टू का उनके द्वारा मजाक बनाया जाना अमेरिका को मिले फर्स्ट वर्ल्ड यानी दुनिया को राह दिखाने वाला देश होने के तमगे पर सवाल खड़े करता है।