हरदोई बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा पर भोजनावकाश में जुटे बैंककर्मी

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पीएसयू बैंकों के विलय के विरोध में किया प्रदर्शन
26 दिसम्बर को सभी बैंकों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का एलान
बैंकों की प्रमुख समस्या खराब ऋण हैं। बैंकों का विलय इन खराब ऋणों को वसूल करने का कोई समाधान नहीं है। कारपोरेट चूककर्ताओं और दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही सहित कठोर उपाय करने की जरूरत है। बैंककर्मी आज अपने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के द्वारा सरकार के बैंकों के विलय के निर्णय का सड़कों पर उतर कर विरोध कर रहे हैं।
यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के बैनर के नीचे विभिन्न बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी आज गुरुवार को दोपहर बाद भोजनावकाश में बैंक ऑफ़ बड़ोदा की मुख्यशाखा पर बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठे हुए। प्रदर्शनकारी बैंक कर्मियों ने बैंकों के मर्जर को मर्डर बताते हुए सरकार और बैंक मैनेजमेंट के विरोध में जमकर नारेबाजी की।
#यूनाइटेड_फोरम_ऑफ़_बैंक_यूनियंस के #स्थानीय_संयोजक #आर_के_पाण्डेय ने कहा कि #बॉब, #देना_बैंक और #विजया_बैंक के एकीकरण का प्रस्ताव सरकार का अनुचित निर्णय है। बैंक कर्मचारी इसके विरुद्ध देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर अपना प्रतिरोध व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में स्टेट बैंक में उसके सहयोगी बैंकों के विलय से कोई चमत्कार नहीं हुआ है। इस विलय के नतीजे में बैंक शाखाओं की बंदी, कर्मचारियों की संख्या में कमी, व्यवसाय में कमी और खराब ऋणों में वृद्धि हुयी है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के #वाइस_चेयरमैन #क्षितिज_पाठक ने कहा कि जो बैंक सदियों से अस्तित्व में हैं और देश की अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान कर रहे हैं। उनके नाम से देशवासियों की भावनाए जुडी हुयी है। उनका एकाएक अस्तित्व समाप्त हो जाना देश के लिए किसी सदमें से कम नहीं है।
#बैंक_यूनियंस_के_बैंकों_के_विलय_के_विरोध_में_प्रमुख_तर्क :
दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में बैंकिंग घनत्व अपेक्षाकृत कम है इसलिए बैंकिंग उद्योग के विस्तार की विशाल संभावनाएं और आवश्यकता है। विलय की कोई आवश्यकता नहीं है।
ऐसे हजारों गांव हैं जहां बैंक नहीं पहुंचे हैं बहुत से लोग बैंकिंग से वंचित हैं इसलिए बैंकों के विस्तार की जाने की आवश्यकता है।विलय की कोई आवश्यकता नहीं है।
क्योंकि बैंकिंग सभी लोगों तक नहीं पहुंच पाई है इसलिए सरकार ने जनधन योजना शुरू की अब सरकार ने जनधन योजना II शुरू की है इसका अर्थ है कि हम अभी भी जनता के सभी वर्गों तक नहीं पहुंचे हैं इसलिए हमें बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने की आवश्यकता है विलय के परिणाम स्वरुप बैंकिंग का संकुचन होगा इसलिए विलय की कोई आवश्यकता नहीं है।
कहा जाता है कि विलय से बड़े आकार के बैंकों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए हमारे बैंकों को बड़ा बनाने के लिए प्रस्तावित है बैंक जितना बड़ा होगा जोखिम उतना ही अधिक होगा पहले से ही बैंक कारपोरेट चूक से पीड़ित हैं इसलिए बैंकों का विलय करके उन्हें बड़ा नहीं बनाना चाहिए इसलिए विलय की आवश्यकता नहीं है।
सरकार का तर्क है कि विलय से बैंकों का सुधार हो जायगा। इस निष्कर्ष का कोई प्रमाण नहीं है इस तर्क के साथ पिछले वर्ष 6 बैंकों का स्टेट बैंक के साथ विलय किया गया था लेकिन स्टेट बैंक विश्व स्तर पर कोई बड़ा बैंक नहीं बन सका एसबीआई की समस्याएं बड़ी ही हो गई है इस प्रकार बैंकों के विलय से मदद बैंक बड़े नहीं होंगे।
पहले की धारणा बहुत बड़ा बैंक विफल नहीं हो सकता अमेरिका के बाद अब एक मिथक बन गया है बड़े बैंक ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं इस प्रकार बड़े बैंकों का मतलब एक बड़ा जोखिम है भारत ऐसे जोखिम बर्दाश्त नहीं कर सकता इसलिए विलय और हमारे बैंकों को बड़ा बनाने को ठंडे बस्ते में डाला जाना चाहिए।
कहा जाता है कि विलय बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रस्तावित है। खराब ऋण बैंको द्वारा सामना की जाने वाली मुख्य समस्या है क्या कोई यह मान सकता है कि इसके परिणामस्वरूप खराब ऋणों की वसूली होगी, जाहिर है नहीं, इसलिए यह भी एक गलत धारणा है।
बैंकों द्वारा सामना की जा रही खराब की समस्या को हल करने के लिए सरकार को खराब ऋण को वसूल करने के लिए कठोर कदम कठोर उपाय करने चाहिए इसके बजाय सरकार बैंकों के विलय का सहारा लेकर ध्यान बांटने की कोशिश कर रही है जो कि अवांछित है।
बैंकों का विलय और उस से उत्पन्न होने वाली परिणामी मुद्दे खराब ऋणों के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल देंगे इसलिए बैंक और पीड़ित होंगे।
एक अन्य तर्क यह है कि विलय और बड़े बैंक बनाकर बैंक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन जायगें। विश्व स्तर पर अग्रणी बैंकों का जो पूंजी आधार है उस तक भारत के सभी बैंक भी मिलकर नहीं पहुंच सकते। इसलिए विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा की बात भी सही नहीं है।
बैंकों के विलय से शाखा बंदी होगी जबकि भारत में बैंकों के शाखा विस्तार की अभी भी आवश्यकता है।
प्रदर्शनकारियों में प्रमुख रूप से अजय मेहरोत्रा, आर के मिश्रा, वरुण सिंह, रोहित कुमार, मो० शहीद, सोमेंद्र गुप्ता, संदीप, ऋषिपाल, वर्षा मेहरोत्रा, रचना तिवारी, साधना देवी, वैशाली सिंह, अनुज सिंह, दीपक बाजपेई, पुष्कर गुप्ता, देशदीपक दिवाकर, गया प्रसाद, रामबाबू मिश्रा, राजेश कुमार, संदीप पटेल, जगदीश प्रसाद, पवन मिश्रा, रोचिन सिन्हा, विभांशु, प्रकाश दुबे आदि मौजूद रहे।