…और मैं उसके चरागों का अदब करता रहा, पिहानी में मुशायरा, कवि सम्मेलन व प्रतिभा सम्मान समारोह

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रसखान अदबी सोसाइटी के तत्वावधान में बाजार इस्लामगंज मैदान पर आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा, कवि सम्मेलन व प्रतिभा सम्मान समारोह में भारी भीड़ उमड़ी। मशहूर शायर वासिफ फारूकी को ‘रसखान लिटरेरी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। पांच प्रमुख स्कूलों के टॉपर बच्चों को रसखान एकेडमिक अवार्ड दिए गए।
मशहूर शायर वासिफ फारूकी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम का आगाज नगर के युवाओं सफवान हयात व महताब हैदर ने कौमी गीत से किया। फारूकी का यह शेर खूब पसंद किया गया ‘उसने गुल कर दिए सब चांद सितारे मेरे, और मैं उसके चरागों का अदब करता रहा।’ एटा के अज्म शाकरी ने गजल छेड़ी ‘लाखों सदमे, ढेरों गम, फिर भी नहीं हैं आंखें नम।’
कानपुर की शाइस्ता सना देर तक माइक पर रहीं, उनका यह शेर खूब सुना गया ‘जो उदासी थी चेहरे पे कम हो गई, वो मसर्रत मिली आंख नम हो गई। टूट कर क्यों न चाहूँ कि उसने मुझे, मां कहा और मैं मोहतरम हो गई।’ कार्यक्रम संचालक हिलाल बदायूंनी ने कहा ‘उससे बिछड़ के ऐसे मेरा दिल है, जैसे बिछड़ के मौज से साहिल उदास है।’ फैज खुमार बाराबंकवी ने पढ़ा ‘किस्सा ए दिल कोई नहीं पढ़ता, इस लिए मुख्तसर लिखा जाए।’ फारूक आदिल लखनवी ने पढ़ा ‘आप जब भी कलाम करते हैं, मेरी नींदें हराम करते हैं।’ झांसी के अभिराज पंकज ने कहा ‘जाने कितनों का वार होता है, रोज दिल यह शिकार होता है।’ रंजना सिंह हया ने पढ़ा ‘औरत को ही पाठ पढ़ाया जाता है, कैसे जीना यह समझाया जाता है।’
आजमगढ़ के हास्य शायर शाहिद बर्की ने सभी को खूब हंसाया ‘मेरी बांहों में वो खुद बखुद आ गया, इश्कबाजी का मुझ पे नशा छा गया। मैंने माशूक को अपना दिल दे दिया, और जालिम पका कर उसे खा गया।’ वसीम रामपुरी ने पढ़ा ‘हुस्न की अजमत बढ़ाए उनके चेहरे की नकाब, घर में रहने वाली सारी लड़कियां अच्छी लगीं।’ कलीम तारिक सैयदनपुरी ने शेर पेश किया ‘लगता है तुम भी गैर की बातों में आ गए, सुनते नहीं हो कोई मेरी बात इन दिनों।’ आयोजक सलमान जफर ने पिहानी का प्रतिनिधित्व करते हुए पढ़ीस ‘तेरी जुल्फों के साये के लिए काँधे कहाँ मेरे, मेरे कांधों को जिम्मेदारियां आवाज देती हैं।’ महमूदाबाद के गूगल हिंदुस्तानी ने ठहाके लगाने पर मजबूर किया ‘मार्केट में अगर अहलिया संग है, जिंदगी हर कदम इक नई जंग है।’ आगरा से आईं कवियित्री सलोनी राना ने कौमी एकता के शेर सुनाए ‘वेद, गीत, कुरान सीखेंगे, दे के हर इम्तेहान सीखेंगे। जिसमें तहजीब का खजाना है, हम वो उर्दू जबान सीखेंगे।’ लखनऊ के सलीम ताबिश ने पढ़ा ‘उसकी तरक्कियों का सबब जान जाएगा, उस आदमी के पांव के छाले तलाश कर।’
इसके अलावा, अमीर फैसल, वकार काशिफ, अंचित श्रीवास्तव, वसीम बदायूनी, फारूक महवर, फारूक सरल व उमर फारूकी आदि ने भी कलाम पेश किया। इस मौके पर क्षेत्राधिकारी शैलेन्द्र कुमार, कोतवाल श्यामबाबू शुक्ला, पूर्व चेयरमैन डाक्टर सईद खां, मोहसिन जमीर जैदी, अवधेश रस्तोगी, उजैर सिद्दीकी, अम्मार हुसैन जैदी, नवनीत बाजपेई, गोपाल गुप्ता, डॉ. मुजाविर जैदी, सभासद राजीव गुप्ता, हफीज मंसूरी, मिन्हाजुद्दीन अंसारी, वजीहुद्दीन, मोहम्मद अनीस व शुऐब खां समेत स्थानीय शायर मौजूद रहे। अंत में आयोजकों सलमान जफर व फरीद कैफी ने आभार जताया।