हरदोई : ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर मुबाहिसे के बहाने नरेश ने दिखाया अपना फ़न

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सुनील बंसल : लोस-विस चुनाव अलग अलग होने से सरकारों को काम को मिलते महज डेढ़ बरस

विद्रूप : गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करवाना भूले आयोजक, प्रतिबन्धित पॉलीथिन में बांटा गया लइया-चना

बृजेश ‘कबीर
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कद्दावर नेता व भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य नरेश अग्रवाल के मुख्य वक्तृत्व (नेतृत्व भी) में ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विषय पर आज गांधी मैदान में राष्ट्रीय चिन्तन एवं विशाल संगोष्ठी आहूत हुई। संगोष्ठी का आयोजक भले ही जिला भाजपा को बताया गया। लेकिन, वन नेशन वन इलेक्शन के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के विचार को सार्वजनिक विमर्श में लाने के बहाने अग्रवाल ने मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश महामन्त्री (संगठन) सुनील बंसल के सामने गृह जनपद में विविध तबकों (बुद्धिजीवियों, व्यापारियों, किसानों, छात्रों व युवाओं) में अपनी पकड़ और स्वीकार्यता का प्रदर्शन ही मुख्य रूप से किया। भाजपा के दोनों निर्वाचित सांसदों और सभी विधायकों को मंच पर लाकर अग्रवाल ने राजनीतिक प्रबन्धन कौशल का भी मुजाहिरा किया। आयोजन अग्रवाल के शक्ति प्रदर्शन का जरिया इसलिए भी लगा कि मंच पर लगे भारी-भरकम फ्लैक्स पर चिन्तन संगोष्ठी के विषय का कोई उल्लेख ही नहीं था। जबकि, वितरित किए गए आमन्त्रण पत्रों, प्रचार होर्डिंगों और समाचार पत्रों में दिए विज्ञापनों में आयोजन के विषय का प्रमुखता से जिक्र किया गया था।
बहरहाल, भाजपा प्रदेश महामन्त्री (संगठन) ने कहा लोकसभा व विधानसभाओं के अलग अलग चुनाव से आदर्श आचार संहिता के कारण सरकारें नए विकास कार्यक्रमों की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाती हैं। बार-बार चुनावों के कारण राजनीतिक दलों द्वारा एक के बाद एक लोक-लुभावन वादे किये जाते हैं, जिससे अस्थिरता बढ़ती है, देश का आर्थिक विकास प्रभावित होता है और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे केन्द्र में नहीं आ पाते। बार-बार चुनाव से शिक्षा क्षेत्र के साथ अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों का काम-काज प्रभावित होता है। क्योंकि, बड़ी संख्या में शिक्षकों सहित एक करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल होते हैं। इसलिए राष्ट्र-हित में ग्राम पंचायत से पार्लियामेन्ट तक के चुनाव एक साथ कराए जाने का प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का विचार स्थापित करना ही होगा। बंसल ने अलग अलग चुनावों के नुकसान आंकड़ों की छाया में समझाया। कहा, 05 वर्ष में 1865 दिवस होते हैं, जिनमे चुनाव के कारण औसतन 629 दिवस आदर्श आचार संहिता लगी रहती है। इस तरह सरकारों को 05 वर्ष में औसतन डेढ़ वर्ष ही काम करने का अवसर मिलता है। कहा, 2009 के लोकसभा चुनाव में ₹1,100 करोड़ से ज़्यादा खर्च हुआ। वर्ष 2014 के चुनाव में यह खर्च बढ़ कर ₹3,400 करोड़ हो गया। लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ होने से धन व समय दोनों की बचत होगी। बंसल ने कहा, मतदान अनिवार्यता की बात होती है। सच्चाई ये है कि प्रजातंत्र में सबसे बड़ी भागीदारी उन गांवों की सबसे ज़्यादा होती है, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। जबकि, अधिक सहूलियतें पाने वाले शहरी क्षेत्र मतदान में उदासीनता बरतते हैं। बंसल ने कहा, एक राष्ट्र एक चुनाव के विचार को आम लोगों व युवाओं के बीच बहस में लाने के लिए युवा मोर्चा हर जिले में यूथ पार्लियामेन्ट का आयोजन करेगी।
मुख्य वक्ता नरेश अग्रवाल ने कहा, एक सार्थक चर्चा हरदोई से शुरू हुई है। हरदोई ने तमाम विचारधाराओं को बदला। हरदोई ने जो दिया जलाया, उसने देश में तूफान उठाया। अलग-अलग चुनाव की प्रासंगिकता के विपक्ष अपना विचार अग्रवाल ने दिलचस्प अंदाज़ में बयां किया। कहा, दुनिया के राष्ट्राध्यक्ष प्रधानमन्त्री से कहते हैं कि मोदी जी डायरी देख लीजिए, आपके यहां जब चुनाव नहीं हों तो बैठक रख ली जाए, यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। वन नेशन वन इलेक्शन बड़ी सोच का मुद्दा है। उन्होंने संविधान में भारी गड़बड़ी बताते हुए संशोधन को ज़रूरी बताया। कहा, संविधान में संशोधन की बात आती है तो विपक्ष आरएसएस पर अपना एजेण्डा सेट करने का आरोप लगाने लगता है। जबकि, 03 हजार कानून ऐसे हैं जिन्हें ख़त्म करने की ज़रूरत है। अग्रवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी को चोर कहे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण ठहराया। कहा, वैचारिक मतभेद अलग बात है। लेकिन, सोचना चाहिए कि पीएम को चोर कहने से दुनिया के सामने क्या सन्देश जाता है। नेताओं पर दर्ज मुकदमों की तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन को लेकर भी अग्रवाल ने खिंचाई की। कहा, नेताओं के ख़िलाफ़ मुकदमों के तेजी से निपटारे के लिए विशेष अदालतें बनेंगी। अपराधियों और देशद्रोहियों के लिए नहीं। भाषण के अन्त में अग्रवाल भाजपा जिलाध्यक्ष से मुख़ातिब हुए और कहा, शास्त्री जी हमको भी पराया नहीं समझिएगा। हम कुछ लेने नहीं देने आए हैं। राजनीति में जो हासिल करना था वह सब 40 बरस में कर चुके। अब तो वह पार्टी और देश की सेवा करने आए हैं।
सदर सांसद अंशुल वर्मा ने वन नेशन वन इलेक्शन का समर्थन करते हुए ऑनलाइन वोटिंग की वक़ालत की। कहा, मतदाताओं को आधार से लिंक कर देना चाहिए। जिससे बैलेट और ईवीएम से वोटिंग समाप्त की जा सके। कहा, हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। वन नेशन वन इलेक्शन चुनाव की बात की जा रही है। सही मायने में हर नागरिक को एक सिंगल नॉन ट्रांसफरेबल बैलेट दिया जाना चाहिए। हर नागरिक को आधार से लिंक कर दिया जाना चाहिए। जिससे ईवीएम से आगे की सोच आना चाहिए और डिजिटल इंडिया के सपने को साकार किया जा सके। चिन्तन गोष्ठी को मिश्रिख सांसद डॉ0 अंजू बाला व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष/अवध क्षेत्र प्रभारी जयेन्द्र प्रताप सिंह राठौर के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष राम अवतार शुक्ला, निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्रा, अशोक सिंह मुनौरापुर, सुशील अवस्थी ‘छोटे महराज’, शिक्षा क्षेत्र से जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ राष्ट्रीय/प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, चिकित्सा क्षेत्र से डॉ0 एपी सिंह, पत्रकारिता क्षेत्र से आमिर किरमानी व विधि क्षेत्र से गुंजन मिश्रा आदि ने एक राष्ट्र एक चुनाव के विषय में विचार रखे। चिन्तन संगोष्ठी कि अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण शास्त्री ने की। अन्त में आभार जताते हुए शास्त्री ने चिर परिचित अंदाज़ में नरेश अग्रवाल की बात का उत्तर भी दिया। इससे पहले सदर विधायक/पूर्व राज्यमन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने स्वागत भाषण किया। मंच संचालन पूर्व पालिकाध्यक्ष रामप्रकाश शुक्ला ने किया। सदर विधायक नितिन अग्रवाल व पालिकाध्यक्ष सुख सागर मिश्रा ‘मधुर’ ने मुख्य अतिथि बंसल, अवध क्षेत्र अध्यक्ष सुरेश चन्द्र तिवारी व किसान मोर्चा प्रदेश महामन्त्री/जिला प्रभारी सुधीर सिंह ‘सिद्धू’ को बुके और स्मृति चिन्ह दे कर स्वागत किया।
बालामऊ विधायक रामपाल वर्मा, शाहाबाद विधायक रजनी तिवारी, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश, सण्डीला विधायक राजकुमार अग्रवाल ‘राजिया’, सवायजपुर विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह ‘रानू’, बिलग्राम-मल्लावां विधायक आशीष सिंह पटेल ‘आशू’, पूर्व दर्जा राज्यमन्त्री/पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विद्याराम वर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष उमेश अग्रवाल, मल्लावां पालिकाध्यक्ष अंकित जायसवाल, भाजपा जिला कोषाध्यक्ष डॉ0 अनुज गुप्ता, एससी/एसटी कमीशन के पूर्व सदस्य प्रदीप कुमार ‘पीके वर्मा’, हाजी वसीम अहमद आदि मंच पर रहे। चिन्तन गोष्ठी में सदर विधायक नितिन अग्रवाल को छोड़ किसी भी विधायक को बंसल का स्वागत करने और डॉयस पर पहुंचने का अवसर नहीं मिला।
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राजीव रंजन उवाच : नरेश द्रोणाचार्य, मैं एकलव्य
सूबे में भाजपा सरकार आने के बाद जिला पंचायत से लेकर आर्य समाज के शैक्षणिक संस्थाओं के निजाम से ‘अग्रवाल’ परिवार को बे-दख़ल करने के लिए सभी घोड़े खोल देने वाले भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्रा के तेवर आज समर्पण में ढले दिखे। कहा, मैं सुरसा क्षेत्र का निवासी हूं, जो नरेश अग्रवाल का गढ़ है। राजनीतिक कौशल, प्रबन्धन और पब्लिक में उनकी एप्रोच को देख कर सदैव सपना देखता था कि नरेश अग्रवाल भाजपा में होते और मैं उनसे गुरुमंत्र ले पाता। विपक्ष में होते हुए जानता था कि वह कभी गुरुमन्त्र नहीं देंगे। इसलिए, मैंने उन्हें द्रोणाचार्य मान खुद को एकलव्य की भूमिका में ढाल लिया और 2014 में लोकसभा की सदर और मिश्रिख सीटें पार्टी के लिए जीत लीं। हालांकि, ये कहते हुए राजीव रंजन 2014 के आंकड़े भूल गए। सदर लोकसभा क्षेत्र में आने वाले सुरसा इलाके में भाजपा मुख्य मुकाबले से भी बाहर थी। वहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में सीधा मुकाबला हुआ था।
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बहरहाल, चूंकि ‘एक साथ चुनाव की बात’ पर सार्वजनिक चर्चा हरदोई से शुरू हुई है तो इसकी मीमांसा भी होगी, लेकिन आगे, जुड़े रहें अंतर्ध्वनि डेस्क से ।