‘अंग्रेज़ी’ पर रोचक संस्मरण लेकर आए हैं पुलिस डिपार्टमेंट के धर्मराज उपाध्याय

0
10

मेरी अंग्रेज़ी हमेशा से कमज़ोर रही है। कक्षा 05 तक हमारे प्राइमरी में अंग्रेज़ी की पढ़ाई ही नही होती थी। कक्षा 06 के बाद जो अंग्रेज़ी की पढ़ाई शुरू हुई तो हम bat (बैट), cat (कैट), rat (रैट) से आगे नही बढ़ पाए। कभी हमारी समझ में कमेटी, कॉफ़ी, फ़्यूचर, नेचर की स्पेलिंग्स नहीं आईं। जाने कितने डंडे हाथों पर टूट गए। कितनी-कितनी देर मुर्गा बने रहे स्कूल में, क्या-क्या बताएं! ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार वाली कविता किसी तरह मारपीट के जो याद किये तो किसी तरह से कक्षा 08 पास कर पाए ग्रेस मार्क के साथ! 08 पास करने के बाद मैंने कह दिया कि अब अंग्रेज़ी को गुड बाई कह दूंगा, लेकिन मेरे पिता जी किसी भी तरह से राज़ी नही हुए कि मैं साइंस छोड़ के आर्ट्स में दाखिला लूँ। पिता जी अपने ज़माने के क्रोधी और इतनी ज़बरदस्त ठुकाई करने वाले थे कि रूह कांप जाए देखने वालों की! जिसपे पड़े उसका कहना ही क्या। खैर, किसी तरह हमने इंटर पास किया। स्नातक हुए, लेकिन अंग्रेज़ी का मेरा ज्ञान जस का तस ही रहा। मैंने अपने अंग्रेज़ी ज्ञान को बढ़ाने के लिए सारे प्रयास किये। रोज़ अंग्रेज़ी अखबार पढ़ने की कोशिश की। अपने दोस्तों से अंग्रेज़ी में बात भी करना शुरू किया। समझ में न उन्हें आये न हमें! देशी छोड़ के अंग्रेज़ी लेना शुरू कर दिया! अंग्रेज़ी लेने के बाद अंग्रेज़ी बोलना शुरू कर दिया लेकिन जैसे ही अंग्रेज़ी का असर खत्म होता वैसे ही भाषा भी अंग्रेज़ी से हिंदी में धीरे धीरे आ जाती। वैसे मैंने अपना अंग्रेज़ी ज्ञान बढाने के लिए अंग्रेज़ी फिल्में भी बहुत देखीं। लेकिन उसका भी कोई खास फायदा इसलिए न हुआ क्योंकि ज़्यादातर हिंदुस्तानियों की तरह हमने भी अंग्रेज़ी फ़िल्म हमेशा वॉल्यूम बन्द करके ही देखी थी। आज भी बिना अंग्रेज़ी ज्ञान के धक्के खा रहा हूँ।

(लेखक धर्मराज उपाध्याय निरीक्षक नागरिक पुलिस अपराध शाखा सीतापुर में कार्यरत हैं। उनके शौक हैं अपराध निरोध ,बैडमिंटन क्रिकेट, पढ़ाई और लेखन)