1992 क्रिकेट विश्व कप : पाकिस्तान ने विश्व कप जीत सभी को चौंकाया

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1992 : क्रिक्रेट वर्ल्ड कप के पांचवें संस्करण में बारिश ने कई मैचों का काया पलट कर दिया, यह वर्ल्ड कप पाकिस्तान ने जीता था।

क्रिकेट वर्ल्ड कप का पांचवां संस्करण कई मायनों में वाकई अद्भुत था। 22 साल बाद क्रिकेट के खेल में वापसी करने वाले साउथ अफ्रीका ने टेस्ट का दर्जा हासिल करने के बाद इस वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया। 22 फरवरी से 25 मार्च 1992 तक ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में हुए वर्ल्ड कप के अधिकांश मैच दूधिया रोशनी में खेले गए तथा इन मैचों में टीमें पारंपरिक सफेद पोशाक की बजाय रंगीन कपड़ों में मैदान पर उतरीं। यहां तक कि लाल गेंद की बजाय सफेद गेंद का इस्तेमाल हर मैच में किया गया। पहले 15 ओवर में 30 यार्ड के सर्कल के बाहर केवल दो फील्डर रखने का नियम भी इस वर्ल्ड कप में लागू हुआ। इस नियम ने ही पिंच हिटर को जन्म दिया। इंग्लैंड के ऑलराउंडर इयान बॉथम और न्यूजीलैंड के मार्क ग्रेटब्रेच ने इस नियम का लाभ उठाते हुए कई मैचों में पहले 15 ओवरों के दौरान अपनी टीमों के स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

साउथ अफ्रीका का करिश्माई प्रदर्शन

वर्ल्ड कप में पहली बार उतरी साउथ अफ्रीका की टीम ने 8 लीग मैचों में से 5 में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया, जहां उसका मुकाबला इंग्लैंड से हुआ। ग्रीम हिक के 83 रन की बदौलत इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 45 ओवर में 6 विकेट पर 252 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए अफ्रीकी टीम को मैच की अंतिम 13 गेंद पर 22 रन बनाने थे और उसके 4 विकेट गिरना बाकी थे। तभी बारिश आ गई और मैच 12 मिनट तक रुका रहा। जब बारिश रुकी और मैच शुरू हुआ तो साउथ अफ्रीका के लक्ष्य को पुननिर्धारित कर 1 गेंद में 21 रन कर दिया गया। अंतिम गेंद क्रिस लुईस ने फेंकी, जिस पर ब्रायन मैकमिलन ने एक रन लेकर मैच खत्म किया। इस तरह से बारिश ने साउथ अफ्रीका के स्वर्णिम सफर का अंत कर दिया। पूरे टूर्नामेंट में अफ्रीकी टीम एकजुट होकर खेली थी। बल्लेबाजी में पीटर कर्स्टन तो गेंदबाजी में एलन डोनाल्ड खूब चमके थे। जोंटी रोड्स ने तो अपनी करिश्माई फील्डिंग से पाकिस्तान के खिलाफ हुए मैच को ही अपनी टीम के पक्ष में कर दिया था।

भारत हारा 1 रन से

इस वर्ल्ड कप का बारहवां मैच ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुआ। दोनों टीमों को अपनी पहली जीत की तलाश थी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डीन जोंस के 90 रन की बदौलत 50 ओवर में 9 विकेट पर 237 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने कप्तान मोहम्मद अजरूहद्दीन के 93 तथा संजय मांजरेकर 47 रन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया को अंत तक कड़ी टक्कर दी। भारत को अंतिम ओवर में जीतने के लिए 13 रन बनाने थे। लेकिन भारत मैच एक रन से हार गया। इस मैच के बाद रेन रूल की बेहद आलोचना हुई क्योंकि बारिश रुकने के बाद भारत के लक्ष्य को घटाकर 42 ओवर में 235 रन कर दिया गया यानी कि भारत को तीन ओवरों का नुकसान झेलने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य में केवल दो रन की कमी होने का ही फायदा मिला।

इंजमाम ने न्यूजीलैंड का सपना तोड़ा

अपनी घरेलू जमीन पर वर्ल्ड कप जीतने का ख्वाब देख रहे न्यूजीलैंड को सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने मात देकर सबको चौंका दिया। सेमीफाइनल से पहले न्यूजीलैंड ने 8 में से 7 मैच जीते थे जबकि पाकिस्तान ने सेमीफाइनल में पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने कप्तान मार्टिन क्रो (91) और केन रदरफोर्ड (50) की शानदार पारियों की बदौलत 50 ओवर में 7 विकेट पर 262 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान को अंतिम 15 ओवर में 123 रन बनाने थे और उसके 6 विकेट बाकी थे। युवा बल्लेबाज इंजमाम उल हक़ ने आतिशी पारी खेलते हुए केवल 37 गेंद में 7 चौके और 1 छक्के की मदद से 60 रन ठोक डाले। उनका जावेद मियांदाद (नाबाद 57) ने अच्छा साथ निभाया। दोनों ने 10 ओवर में 87 रन बना डाले। 240 के स्कोर पर इंजमाम के जाने के बाद जावेद ने मोईन खान (9) और वसीम अकरम (नाबाद 20 रन, 11 गेंद, 2 चौके और एक छक्का) के साथ मिलकर पाकिस्तान को चार विकेट की रोमांचक जीत दिला दी।

अकरम बने फाइनल के हीरो

वर्ल्ड कप का फाइनल मैच इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच हुआ। पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने इमरान खान (72), जावेद मियांदाद (58), इंजमाम (42) और वसीम अकरम (33 रन, 18 गेंद, चार चौके) की उपयोगी पारियों की बदौलत 50 ओवर में 6 विकेट पर 249 रन बनाने में सफल रहा। गेंदबाजी में अकरम की तेजी से इन स्विंग होती गेंदों ने इंग्लिश बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। अकरम ने बॉथम को नई गेंद से कैच आउट कराने के बाद दूसरे स्पैल में लगातार 2 गेंदों में इयान लैंब और क्रिस लुईस को बोल्ड कर पाकिस्तान की जीत लगभग तय कर दी। लेग स्पिनर मुश्ताक अहमद और तेज गेंदबाज आकिब जावेद ने क्रमश: 3 और 2 विकेट लेकर पाकिस्तान को पहली बार वर्ल्ड कप विजेता बनाया। वसीम अकरम फाइनल के मैन ऑफ द मैच रहे जबकि न्यू जीलैंड के मार्टिन क्रो प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे।

कुछ आंकड़े:

सर्वाधिक रन: मार्टिन क्रो (न्यूजीलैंड), नौ मैच में 456 रन, सर्वाधिक स्कोर: 100 नाबाद, औसत 114

सर्वाधिक विकेट: वसीम अकरम (पाकिस्तान), दस मैच में 18 विकेट, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: 32 रन देकर 4 विकेट

सर्वोच्च टीम स्कोर: श्रीलंका: 49.2 ओवर में 7 विकेट पर 313 रन, विपक्षी टीम: जिम्बाब्वे

न्यूनतम टीम स्कोर: साउथ अफ्रीका: 29.1 ओवर में 4 विकेट पर 181 रन, विपक्षी टीम: भारत

सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर: रमीज राजा (वेस्टइंडीज)- नाबाद 119 रन बनाम न्यूजीलैंड

सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन: मेरिक प्रिंगल (साउथ अफ्रीका)- 11 रन देकर चार विकेट बनाम वेस्टइंडीज

श्रेष्ठ विकेटकीपर: डेव रिचर्ड्सन (साउथ अफ्रीका)- 14 कैच और 1 स्टंपिंग

सर्वाधिक कैच लेने वाला खिलाड़ी: केप्लर वेसल्स- 7 कैच

1992 का क्रिकेट विश्व कप क्रिकेट के इतिहास में बहुत अहम साल माना जाता है। इस साल हुए टूर्नामेंट को बेन्सन एंड हेजेस कप के नाम से भी जाना जाता है। यह साल ना केवल अपने अनोखे नाम के कारण इतिहास में अंकित हुआ है बल्कि इस साल क्रिकेट में कई सारे बदलाव होने के कारण इसे इतना महत्‍वपूर्ण माना गया है। इसकी शुरुआत सन् 1992 में 22 फरवरी से हुई थी। आज हम आपको इस विश्व कप में घटी कई रोमांचक घटनाओ के बारे में बताएंगे, तो आइए जानते हैं 1992 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बारे में –

1 – कलरफुल जर्सी की शुरुआत

अभी तक क्रिकेट सिर्फ सफेद कपड़ों में ही खेला जा रहा था लेकिन साल 1992 के विश्व कप में पहली बार खिलाड़ियों को कलरफुल जर्सियों में देखा गया था।

तब से वनडे और अब टी-20 में भी रंग-बिरंगी जर्सी का ट्रेंड जारी है। क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब नौ टीमें शामिल हुईं थीं और सभी की ड्रेस अलग रंगों की थी।

2 – नियमो में बदलाव

खेल को और भी ज्यादा रोमांचक व एंटरटेनिंग बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया। जिसके तहत 15 ओवरों की फील्ड पर रिस्ट्रिकशन लगाई गई। इसके हिसाब से केवल 2 फील्डर ही चार मीटर के घेरे में रह सकते हैं और अन्य 5 को इससे बाहर रहना होगा। नियमों को बदल कर कोशिश ये थी कि मैच की शुरुआत में ज्यादा से ज्यादा रन बनाए जा सके। इनके अलावा कई रूल्‍स में बदलाव लाया गया। जिनमें सबसे बडा बदलाव था कि अब मैच में दो नई गेंदों का इस्तेमाल किया जाएगा। चेरी कलर की गेंद की जगह अब सफेद गेंद का यूज़ करना शुरु किया गया। आपको बता दें कि इसी विश्व कप से फ्लडलाइट्स का इस्तेमाल भी शुरु हुआ था।

3 – जावेद मियांदाद और किरन मोरे की झड़प

इंडिया-पाकिस्तान के खिलाड़ियों में अकसर मैच के दौरान कहा सुनी होते देखी गई है। लेकिन 4 मार्च को लॉर्डस मैदान पर दो खिलाड़ियों के बीच ऐसी झड़प हुई कि ये मैच बेहद यादगार बन गया। अम्पायर के लगातार सचिन तेंदुलकर को दो बार नॉट आउट देने पर जावेद मियांदाद कुछ इस तरह बौखलाए कि उनकी वीडियो आज भी उस साल की सबसे यादगार झड़प बन गई।

  • 4 – जोंटी रोड्स की खोज

वैसे तो क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत सन् 1975 में हुई थी लेकिन रंगभेद की नीति के चलते साउथ अफ्रीका को क्रिकेट से बाहर रखा गया था जिसके कारण 1992 का वर्ल्ड कप उनके लिए पहला था। इसी साल जोंटी रोड्स ने साउथ अफ्रीका की तरफ से अपना डेब्यू किया था। जोंटी रोड्स को क्रिकेट इतिहास का सबसे बेहतरीन फील्डर माना जाता है और उन्होंने ये बात अपने पहले पाकिस्तान के खिलाफ़ मैच में साबित भी कर दिखाई थी कि वो इस खिताब के कितने काबिल हैं। रोड्स ने इंजमाम को क्रीज पर वापिस पहुंचने से पहले ही स्टंप आउट कर दिया।

इस विश्व कप की एक और सबसे खास बात ये थी कि पाकिस्तान पहली बार विश्व कप जीत अपने देश लेकर गया था। इमरान खान की कप्तानी के चलते ही ऐसा मुमकिन हो पाया। उस साल फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ़ न्यूजीलैंड जैसी बड़ी टीम थी जिन्हें उन्होंने 212 रन पर ऑल आउट कर विश्व कप 1992 अपने नाम कर लिया।