हर वर्ष बदल दिए जाने वाले पाठ्यक्रम के विरोध में आगे आए अभिभावक

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शिकायती एप्पलीकेशन लेकर सिटी मजिस्ट्रेट से मिले, शिकायत सही पाए जाने पर मिला कार्रवाई का आश्वासन

नए सत्र में स्कूल खुल चुके हैं। अभिभावकों को प्रशासन की तरफ़ से राहत मात्र इतनी मिली है कि ‘जिलास्तरीय शुल्क नियामक समिति गठित की गई है व अब उसकी रिपोर्ट का इंतज़ार हो रहा है। इसके 7 दिन तो पूरे हो चुके हैं, हालांकि रिपोर्ट अभी तक नही आई है। रिपोर्ट आ जाने के उपरांत अगर फ़ीस वृद्धि जायज़ नहीं है तो स्कूलों को जायज़ फ़ीस ही लेनी पड़ेगी। जो अभिभावक फ़ीस जमा कर चुके हैं, उनकी अधिक जमा हो चुकी फीस को एडजस्ट किया जाएगा।

एक और मुख्य समस्या अभिभावकों को आ रही है, वो है हर वर्ष पाठ्यक्रम का बदलाव। अगर गाइडलाइंस की बात की जाए तो एनसीईआरटी (नैशनल कॉउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की पुस्तकें ही मान्य होनी चाहिए, लेकिन पैसा उगाही के खेल के चलते प्राइवेट पब्लिकेशन को स्कूल मैनेजमेंट तरजीह देते हैं। उस पर से कोढ़ में खाज ये कि हर वर्ष बदल भी जाएंगी, ताकि अभिभावक पुरानी पुस्तकें प्रयोग न कर पाएं और नया कोर्स खरीदने को बाध्य हो जाएं। अगर आपको ध्यान होगा तो ज़िलाधिकारी महोदय ने पुरानी किताबों की मुहिम चलाई थी, जिसके तहत उन्होंने पुरानी किताबें दान देने की अपील की थी। अगर अभिभावक भी पुरानी किताबें मैनेज करता है तो इससे नए सत्र में खर्चे की चौतरफा मार से उसे कुछ तो राहत मिलती, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट अपनी सहालगों में आखिरकार कैसे चूकता, और उसने कोर्स आख़िर बदल कर ही दम लिया।

कोर्स बदल जाने से प्रभावित अभिभावक आज डीआईओएस से मिलने पहुंचे, लेकिन वे जीजीआईसी में व्यस्त थे, उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट से मिलने को बोल दिया। सिटी मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार से सेंट जेम्स व सेंट ज़ेवियर्स के अभिभावक मिले और कोर्स बदले जाने की लिखित शिकायत की। सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच की कार्यवाही की बात करते हुए डीआईओएस द्वारा जल्द ही इस पर आख्या देने की बात कही। अब बहरहाल अभिभावक संशय में है, उसके पास इंतज़ार करने के अलावा और कोई चारा है भी नहीं।