जानें, कहाँ फूलों से होली खेलती हैं विधवा महिलाएं

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सफेद लिबास पर गुलाल के छींटे। ढोल और नगाड़ों की थाप पर थिरकते कदम। हवा में लहरते हाथ। पिछली जिंदगी को भूल खिलखिलाते चेहरे और बीच-बीच में होती रंग-बिरंगे और खुशबूदार फूलों की बारिश। आने वाले रंगों के त्यौहार होली तक शायद कुछ ऐसा ही नजारा दिखेगा राधाकुंड, यूपी के मथुरा के मैत्री विधवा आश्रम में। आश्रम में देशभर की 80 से अधिक विधवा महिलाएं रहती हैं।

अपने घर बार से इनका अब कोई नाता नहीं है। लेकिन रघुनाथ दास गद्दी के महंत बाबा केशव दास, जनरल भूपेंद्र, बनी सिंह और आश्रम के प्रबंधक संतोष चतुर्वेदी की कोशिशों के चलते कभी वृंदावन की गलियों में अपना जीवन गुजारने वाली ये विधवा महिलाएं अब देशभर की मइया (मां) कहलाती हैं।