बिलग्राम से शिव यादव
कस्बे में श्री राम लीला एवं प्रर्दशनी समिति के तत्वावधान में आयोजित हो रही ऐतिहासिक व‌ हिंदू-मुस्लिम मुस्लिम एकता की प्रतीक रामलीला में बुराई के प्रतीक के रूप में रावण दहन किया गया। मंचन के दौरान मेघनाद के मारे जाने पर रावण स्वयं रणक्षेत्र में युद्ध करने आया। राम और ‌रावण के बीच घमासान युद्ध होने लगा।‌ राम रावण के सिर ‌काट देते लेकिन तुरंत ही रावण के धड़ पर ‌नया सिर‌ आ जाता। राम इस माया को देखकर हैरान थे। रावण के वध का कोई उपाय न देखकर राम चिंता में पड़ गये। इस बीच रावण के छोटे भाई ‌विभीषण ने ‌राम‌ से कहा कि हे‌ रघुनंदन ! रावण महायोगी है। इसने अपने योग – बल से प्राणों को नाभि में स्थिर कर रखा है। आप अपने दिव्य बाण रावण की नाभि में मारिए। इससे आप रावण का वध करने में सफल होंगे। तब राम ऐसा ही करते हैं और रावण का अंत हो जाता है।
इससे पूर्व पप्पू आतिशबाज व लल्लू‌ आतिशबाज ने प्रतिस्पर्धात्मक ‌आतिशबाजी से आसमान में बहुरंगी छटा बिखेरी। रावण दहन को देखने हेतु नगरवासियों व ग्रामीण क्षेत्र वासियों की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने हेतु पुलिस बल तैनात रहा। इस मौके पर मुख्य रूप से‌ तहसीलदार राजेश कुमार, कोतवाल अमरजीत सिंह, मेला अध्यक्ष प्रदीप यादव, टिल्लू गुप्ता, रामसेवक यादव, प्रबंधक नीरज सिंह, कोषाध्यक्ष अमित विश्वास, संयोजक धर्मेंद्र यादव, परमाई लाल व पवन दुबे सहित कई संभ्रांत लोग उपस्थित रहे।
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