गायत्री विद्यापीठ में शुक्रवार को हुये “रोग निदान एवं स्वास्थ्य रक्षा शिविर” में नेचरोपैथ डॉ० राजेश मिश्र ने कहा कि भोजन पकाने की वैज्ञानिक विधि का ज्ञान न होने से लोग रोगी और दुखी हैं। उन्होंने ‘अदहन’ रखकर भोजन पकाने की वकालत की। अदहन अर्थात् जिसका दहन न हो। कहा कूकर के आने से पूर्व भारत में सर्वत्र खिचड़ी, दाल आदि पकाने के लिए पतीली, भगौने में अदहन रखा जाता था। अदहन के उबलने पर उसमें दाल आदि जो भी पकाना हो उसे भर दिया जाता था।

डॉ० राजेश ने कहा कि समझने की बात यह है कि उबलते पानी में खाद्य को पकाने से तत्व सुरक्षित रहते हैं। ठंडे पानी में आक्सीजन होती है जो नमक मिले पानी को उबालने पर निकल जाती है। उन्होंने बताया कि जब से कूकर आया है तब से अदहन रखकर पकाने की कला बन्द हो गयी। कूकर में ठंडा पानी और खाद्य भरकर आग पर चढ़ा दिया जाता है। जब पानी उबलता है तो ऑक्सीज़न के साथ खाद्यपदार्थ के तत्व भी निकल जाते हैं और भोजन निष्प्राण हो जाता है। अब आवश्यकता है कि कूकर में भी उबला हुआ पानी भरा जाये तभी विटामिन और खनिज लवण सुरक्षित रह सकेंगे और मनुष्य को स्वाद के साथ-साथ पहला सुख निरोगी काया की प्राप्ति हो सकेगी।

शिविर में विजय भाई, रविकांत त्रिपाठी, शिवप्रकाश त्रिपाठी, गीता तिवारी, हर्षित, दीपक मिश्र, अनिल शुक्ल व कई अन्य लोग रहे।

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