सरकार ने मानी अपनी ग़लती

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर को दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन किया। इस प्रतिमा का उद्घाटन एक भव्य कार्यक्रम के साथ किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के अलावा कई गणमान्य हस्तियों ने शिरकत की। एक तरफ जहां इस अनावरण के दौरान हर किसी की नजर प्रतिमा पर थी तो दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया ने इसमे ऐसी कमी ढूंढ निकाली जिसे खुद सरकार ने स्वीकार किया है।
दरअसल प्रतिमा के उद्घाटन के वक्त यहां पर इस प्रतिमा के नाम को अलग-अलग भाषाओं में लिखा गया था। इसे अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गुजराती, तमिल सहित कुल 10 भाषाओं में लिखा गया था। लेकिन तमिल भाषा में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की स्पेलिंग में गलती थी, जिसे सोशल मीडिया पर लोगों ने पकड़ लिया और इस पर कई मीम तक बना दिए। लोगों ने गूगल ट्रांसलेशन के जरिए नाम की स्पेलिंग को साझा किया और इसमे गलती को उजागर किया।
गौर करने वाली बात यह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक तस्वीर साझा की गई थी, जिसमे इस शिलापट को साझा किया गया है। इस शिलापट में प्रतिमा के नाम की तमिल में जो स्पेलिंग हैं वह गलत है। हालांकि कुछ लोगों ने इसे फर्जी तस्वीर कहकर इसे खारिज कर दिया। लेकिन जब गुजरात सरकार से इस बारे में पूछा गया तो उनकी ओर से इसकी पुष्टि की गई और कहा गया है कि हां शिलापट पर नाम गलत लिख गया था।
सरकार की ओर से कहा गया कि हमने इस पूरे कार्यक्रम का प्रबंधन एक प्राइवेट कंपनी को दिया था। जब हमे इस बात की जानकारी दी गई तो हमने तुरंत शिलापट को हटवा दिया है। अब सही नाम के साथ फिर से शिलापट को लगाया जाएगा।
आपको बता दें कि सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने में कुल 2,989 करोड़ रुपए का खर्च आया है। जिसमें 1,347 प्रतिमा निर्माण पर खर्च हुआ है जबकि जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये हैं। इसके अलावा 657 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक प्रतिमा के रखरखाव के लिए खर्च किए जाएंगे। जबकि 83 करोड रुपए की लागत से पुल का निर्माण किया गया है।