नीरज के तरुण कांधों पर है अब 2019 में कमल खिलाने की अहम् जिम्मेदारी

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हरदोई : टीम शास्त्री में मन्त्री पद का ऑफ़र ठुकराना बना सौरभ के लिए वरदान
सौरभ का अर्थ है सुगन्ध, जो कल से सोशल मीडिया पर है अनवरत सुवासित
बृजेश ‘कबीर’
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महज 37 वर्ष की आयु में नीरज मिश्रा ‘सौरभ’ को भारतीय जनता पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया जाना, निश्चित ही हैरान करने वाला घटनाक्रम है। वजह, इस आयु में तो युवा मोर्चा में जिम्मेदारी मिला करती है। कोई ढाई बरस पहले जब भाजपा जिलाध्यक्ष की नियुक्ति की कार्यवाही शुरू हुई थी, तब भी सौरभ ने अपनी दावेदारी रखी थी। हालांकि, तब प्रदेश नेतृत्व ने श्री कृष्ण को जिले में पार्टी के रथ का सारथी नियुक्त किया था। शास्त्री के सामने गुटों में बंटी भाजपा को एकजुट करने के साथ विधानसभा चुनाव की दोहरी चुनौती थी।
जिले में विधानसभा की 08 में 07 सीटें भाजपा की झोली में गईं और जाहिर ही एक हद तक श्रेय जिलाध्यक्ष के नाते शास्त्री के खाते में दर्ज हुआ। लेकिन, वह पार्टी को गुटबाजी से तो नहीं ही उबार पाए, अलबत्ता एक कोटरी विशेष से घिरे रहने के कारण शास्त्री पर ‘नई भाजपा’ खड़ी कर देने के आरोप लगने लगे। पार्टी के गलियारों में आम चर्चा रहती थी कि संगठन की निचली स्तर की इकाइयों के पदाधिकारियों के काम करने में वह दिलचस्पी नहीं लेते थे। नतीजतन, शास्त्री को लेकर भीतरखाने पनप चुका असंतोष बाद के दिनों में सतह पर आ गया।
शास्त्री को लेकर क्षेत्रीय से लेकर प्रदेश नेतृत्व से शिकायतें होने लगीं। लेकिन, क्षेत्रीय महामन्त्री व तत्कालीन जिला प्रभारी नीरज सिंह जिलाध्यक्ष की ढाल बन जाते रहे। निकाय चुनाव में जिले में भाजपा को 13 निकायों में महज बेनीगंज नगर पंचायत अध्यक्ष का पद नसीब हुआ। इसके बाद जिला भाजपा में परिवर्तन की सुगबुगाहट होने लगी। शुरुआत हुई नीरज सिंह को जिले से अम्बेडकर नगर स्थानान्तरित कर। फिर, जिला नेतृत्व में बदलाव की चर्चा आती-जाती रही। लेकिन, तत्कालीन क्षेत्रीय संगठन मन्त्री बृज बहादुर प्रकरण अपनी मेज से आगे नहीं बढ़ने देते रहे।
अवध क्षेत्र का संगठन मन्त्री प्रद्युम्न कुमार को बनाए जाने के बाद भाजपा जिला नेतृत्व के विरुद्ध फिर अभियान तेज हुआ। लेकिन, कोई सर्वसम्मत चेहरा सामने नहीं होने से शास्त्री को अभयदान मिलता रहा। जब प्रदेश उपाध्यक्ष जयेन्द्र प्रताप सिंह राठौर ‘जेपीएस’ को अवध क्षेत्र का प्रभार सौंपा गया, तब जिले में नेतृत्व परिवर्तन की क़वायद को सिरा मिल गया। चूंकि, जेपीएस बग़ल के जिले शाहजहांपुर के हैं, लिहाजा हरदोई में उनके ख़ासे सम्पर्क हैं। उन्होंने, ख़ामोशी से संगठन की निचली स्तर की इकाइयों (मण्डल, सेक्टर व बूथ) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की नब्ज़ टटोली।
जिलाध्यक्ष पद के मजबूत दावेदारों में शुरू में पूर्व जिला उपाध्यक्ष व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अखिलेश पाठक और पूर्व जिला महामन्त्री अभय शंकर शुक्ला का नाम उभर कर आया। साल 2012 में पाठक शाहाबाद और शुक्ला बिलग्राम-मल्लावां से पार्टी सिम्बल पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके थे। एक वक़्त तो वह भी आया जब दावे का साथ कहा जाने लगा कि पाठक का अध्यक्ष बनना तय है। इस बीच सौरभ ख़ामोशी से आरएसएस और भाजपा में अपनी बात रखते रहे। सूत्र बताते हैं, जेपीएस ने प्रदेश महामन्त्री (संगठन) सुनील बंसल को दी गोपनीय रिपोर्ट में जिक्र किया कि सौरभ का जन-प्रतिनिधियों से लेकर निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं से संवाद और स्वीकार्यता है।
जेपीएस की गोपनीय रिपोर्ट पर बंसल की मुहर लग गई और ‘नीरज’ के 11 वर्ष पुराने सांगठनिक कॅरियर का ‘कमल’ खिल गया। प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश का सबसे युवा जिलाध्यक्ष बना दीवाली का बोनान्जा गिफ्ट दे दिया। खबर आम हुई तो सोशल मीडिया बधाइयों से अट गया। निवर्तमान जिलाध्यक्ष शास्त्री ने भी अपनी एफ़बी वॉल पर बधाई पोस्ट की। जवाब में सौरभ ने कहा- अध्यक्ष जी आप मेरी नाव के मांझी हैं। सादर प्रणाम, आपका मार्गदर्शन व स्नेह निरन्तर प्राप्त कर सकूं, यह बांके बिहारी जी से विनती है। पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्रा ने भी 2009 में अपनी टीम में मन्त्री रहे सौरभ को एफ़बी के माध्यम से बधाई दी।
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परदे के पीछे रहा इनका ख़ास क़िरदार
भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर सौरभ को बिठाने के लिए वरिष्ठ नेता व अधिवक्ता रामबली मिश्रा ने आरएसएस और पार्टी में उच्च स्तर पर अपने सभी सम्पर्कों से जबरदस्त पैरवी की। उनके अलावा भी संगठन और संगठनेत्तर अन्य प्रभावशाली लोगों ने सौरभ के लिए कड़ी पेशबन्दी की। वहीं, कानपुर से प्रकाशित एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र को भाजपा से जुडी ख़बरों के परिप्रेक्ष्य में वर्डिक्ट देने में शास्त्री फ़ोन कॉल नज़रअंदाज़ करने लगे, तब अख़बार ने सीधे प्रदेश उपाध्यक्ष/अवध क्षेत्र प्रभारी जेपीएस राठौर का वर्जन लगाना शुरू कर दिया। इससे शास्त्री के मीडिया से नकारात्मक रिश्तों का प्रदेश में सन्देश गया।
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#सौरभ_का_सफ़रनामा
शाहाबाद तहसील क्षेत्र के गुजीदेई गांव के सौरभ साल 2004 में आरएसएस से जुड़े और प्रथम व द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्य करते हुए 2007 में भाजपा से जुड़ गए और तत्कालीन जिलाध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने उन्हें जिला कार्यसमिति में सदस्य बनाया। साल 2009 में तत्कालीन जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्रा ने सौरभ को पहले शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र का सदस्यता अभियान प्रमुख बनाया और बाद में जिला संगठन में मन्त्री पद की जिम्मेदारी दी। साल 2011 में शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी बनाए गए। साल 2013 में सौरभ के राजीव से मतभेद हो गए और उन्हें जिला संगठन में जिम्मेदारी नहीं मिली। इसके बाद सौरभ को अवध क्षेत्र के झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के संयोजक का दायित्व मिला। ढाई बरस पहले शास्त्री जिलाध्यक्ष बने और सौरभ को मन्त्री पद ऑफ़र किया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र का संयोजक बनाया गया। अभी कुछ पीछे सौरभ को युवा मोर्चा के अवध क्षेत्र के अध्यक्ष पद की पेशकश हुई, पर उन्होंने भाजपा में काम करने की इच्छा जताई।
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ज्योतिष कहता, सौरभ की उत्तेजना नियन्त्रित करता है #अरुण
शनि देव और हनुमान को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। जनवरी और फरवरी में कुंभ राशि के सौरभ नाम के लोग जन्म लेते हैं। सौरभ की जन्मतिथि 18 फ़रवरी है। कुम्भ राशि के सौरभ नाम के लोगों की उत्तेजना और परिसंचरण अरुण ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। अरुण का शाब्दिक अर्थ प्रातःकाल के सूर्य की लालिमा व सूर्य का सारथी भी होता है। सौरभ नाम के लोगों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा अपार होती है। ये दोस्तों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।