जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर है। किसान से लेकर व्यापारी तक हर कोई अपने-अपने स्तर पर पाकिस्तान का विरोध जता रहा है। इस कड़ी में सीतापुर के व्यापारियों ने मसूर की दाल पाकिस्तान नहीं भेजने का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक सीतापुर में मसूर की दाल की पैदावार बड़ी मात्रा में होती है। जो पंजाब के रास्ते पाकिस्तान और बंगलादेश भेजी जाती है।

इससे पहले मोदी सरकार ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले ‘हमारे हिस्से के पानी’ को रोकने का निर्णय किया था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, भारत के तीन नदियों के अधिकार का पानी प्रोजेक्ट बनाकर पाकिस्तान के बजाय यमुना में छोड़ा जाएगा। मालूम हो कि व्यास, रावी और सतलज नदियों का पानी भारत से होकर पाकिस्तान पहुंचता है। इसका मतलब यह हुआ कि आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तान अब बूंद-बूंद को तरसेगा।