क्रिकेट विश्व कप 1996 : श्रीलंका विश्व कप जीतने वाला एशिया का तीसरा देश बना था

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छठा क्रिकेट विश्व कप (विल्स विश्व कप): वर्ष 1996  क्रिकेट विश्व कप 1996 का आयोजन भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से किया था। छठे क्रिकेट विश्व कप का नाम इस के प्रायोजक विल्स कंपनी के नाम पर विल्स विश्व कप रखा गया था। इस विश्व कप में 12 देशों ने हिस्सा लिया था। संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और केन्‍या ने पहली बार विश्व कप में भाग लिया। टीमों को छह-छह के दो ग्रुपों में बांटा गया था। इसी विश्व कप से तीसरे अंपायर की भी भूमिका शुरू हुई।

विश्व कप में श्रीलंका में होने वाले मैचों को लेकर विवाद भी हुआ था। ज्ञात हो कि विश्व कप के कुछ दिन पहले संदिग्ध तमिल विद्रोहियों के हमले में 90 लोग मारे गए थे। फलस्वरूप ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में जाकर मैच खेलने से इनकार कर दिया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इन दोनों मैच का विजेता श्रीलंका को घोषित कर दिया था। इसके अलावा भारत और श्रीलंका के बीच ईडन गार्डंस में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में दर्शकों के हुड़दंग के कारण आईसीसी ने श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया था।

फाइनल रहा था एकतरफा

फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में श्रीलंका से हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए मार्क टेलर के 74 रनों की मदद से 241 रन बनाए, लेकिन श्रीलंका ने तीन विकेट के नुकसान पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया। लेकिन इतने एकतरफा फाइनल की किसी ने कल्पना नहीं की थी। किसी भी विश्व कप फाइनल में एक खिलाड़ी ने इतना दमखम नहीं दिखाया था, जैसा कि इस फाइनल में अरविंद डी सिल्वा ने दिखाया। उन्होंने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रनों की पारी खेली। श्रीलंकाई क्रिकेट के इतिहास के पन्ने पलटते ही आप जान जाएंगे कि विश्व कप में जीत किसी तुरत फुरत रणनीति कामयाबी नहीं बल्कि सूझबूझ की एक निरंतर प्रकिया का नतीजा है। अर्जुन रणतुंगा ने जीत के बाद कहा था कि हम लिफ्ट से सीधे 15वीं मंजिल तक नहीं पहुंचे। सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़े और नतीजा सबके सामने है। 1996 में श्रीलंकाई टीम के अभियान का सुंदर अंत हुआ। साथ ही यह अहसास करा गया कि श्रीलंका क्रिकेट को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता।