विश्व कप क्रिकेट 2011 : 28 सालों बाद धोनी ने भारत को बनाया था चैंपियन

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भव्य आतिशबाजी और मनोहारी लेजर शो के बीच 17 फरवरी को बांग्लादेश के बंगबंधु स्टेडियम में 10वें आईसीसी वर्ल्ड कप का शुभारंभ हुआ। एक मेजबान के रूप में क्रिकेट विश्व कप पर कब्जा भारत का सपना था। इस सपने को धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम के खिलाडिय़ों ने सच कर दिखाया। उद्घाटन समारोह में सभी 14 टीमों के कप्तानों को साइकिल रिक्शों पर बैठा कर समारोह में लाया गया। 19 फरवरी को टूर्नामेंट का पहला मैच भारत और बांग्लादेश के बीच खेला गया।

फाइनल का रोमांच

रोमांच और जुनून के चरम पर पहुंच चुके क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत ने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया। विजय की एक नई इबारत को लिखते हुए टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन कर श्रीलंका को 6 विकेट से हरा कर वर्ल्ड कप चूमने का हक हासिल किया। महेंद्र सिंह धोनी के धुरंधरों ने 28 साल बाद वो कर दिखाया जो 1983 में कपिल देव की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने इंग्लैंड में किया था। 2 अप्रैल को मुबंई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए वर्ल्ड कप के फाइनल में धोनी ने श्रीलंका के तेज गेंदबाज कुलशेखरा की गेंद पर छक्का मारा तो पूरा भारत जीत की खुशी से झूम उठा।

श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 6 विकेट पर 275 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। श्रीलंका के 275 रनों के स्कोर के पीछे महेला जयवर्धने की 103 रनों की शतकीय पारी ने अहम भूमिका निभाई। भारत की ओर से इस विश्व कप में कुल 21 विकेट झटककर पाकिस्तान के कप्तान शाहिद अफरीदी की बराबरी करने वाले जहीर खान सबसे सफल गेंदबाज रहे। भारत की इस ऐतिहासिक जीत के हीरो गौतम गम्भीर रहे जिन्होंने (97) रनों की साहसिक पारी खेली। भारत को वीरेंद्र सहवाग (0) और सचिन तेंदुलकर (18) के आउट होने से काफी बड़ा झटका लगा। लेकिन गौतम गम्भीर (97) और कप्तान धोनी (91) की बेजोड़ साझेदारी ने भारत के सिर पर जीत का सेहरा बांध दिया। इस तरह श्रीलंकाई टीम का 1996 के बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने और अपने महानतम गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन को खिताबी विदाई देने का सपना धरा का धरा रह गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 1300 से अधिक विकेट ले चुके मुरलीधरन ने इस मैच के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

विश्व कप में भारत का सफर

भारत ने चार पूर्व चैम्पियनों को हराकर अपने अद्भुत खेल की बदौलत विश्वकप अपने नाम कर लिया। विश्वकप की पूरी सीरीज में भारत को शुरूआत से ही जबरदस्त टक्कर मिली। विश्व कप में भारत का सफर कुछ इस तरह रहा-

विश्व कप के ग्रुप- बी का पहला मैच भारत और बांग्लादेश के बीच खेला गया। भारत के चार विकेट पर 370 रनों के जबाब में बांग्लादेश ने 9 विकेट पर 283 रन बनाए। भारत 87 रनों से जीता।

भारत का दूसरा मुकाबला इंग्लैंड से हुआ। भारत के 338 रनों के जवाब में इंग्लैंड ने भी आठ विकेट पर 338 रन बना कर मैच टाई कराने में सफल रहा।

आयरलैंड के साथ हुए मैच में भारत ने आसानी से पांच विकेट से मैच जीत लिया।

भारत ने नीदरलैंड के 189 रनों के जवाब में पांच विकेट के नुकसान पर 191 रन बनाए, भारत ने यह मैच पांच विकेट से जीता।

कमजोर टीमों के साथ हुए सभी मुकाबलों में भारत आसानी से जीत दर्ज कराता गया पर दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए मैच में भारत के विजय अभियान में रोक लग गई। टीम इंडिया को खराब क्षेत्ररक्षण और कमजोर गेंदबाजी का खामियाजा भी भुगतना पड़ा और दक्षिण अफ्रीका ने भारत को तीन विकेट से हरा दिया।

हार के बाद सम्भलते हुए भारत ने वेस्टइंडीज को 80 रनों से मात दी। भारत के 296 रनों के जवाब में वेस्टइंडीज की टीम ने 188 रन ही बनाए।

भारत क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लगातार तीन बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से भिड़ा। ऑस्ट्रेलिया ने 260 रनों का स्कोर खड़ा किया। पर युवराज सिंह और रैना के धमाकेदार प्रदर्शन ने ऑस्ट्रेलिया को विश्व कप से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस करारी हार के बाद कप्तान रिकी पोंटिंग ने अपनी कप्तानी से इस्तीफा दे दिया।

भारत बुलंद हौसलों के साथ सेमीफाइनल में पाकिस्तान से मुकाबले के लिए उतरा। लेकिन पाकिस्तान के साथ विश्वकप का एक भी मैच न हारने वाला भारत इस बार भी अजेय रहा। भारत ने पाकिस्तान को हराकर फाइनल में जगह बनाई।
1996 विश्वकप टीम की विजेता श्रीलंका ने न्यूजीलैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल के दिलचस्प मुकाबले में भारतीय शेरों के सामने श्रीलंकाई चीतों की एक न चली और भारत ने 2011 का आईसीसी क्रिकेट विश्वकप जीत लिया। इस पूरे टूर्नामेंट में कई बड़े उलटफेर हुए और कई महान खिलाडिय़ों ने सन्यास की घोषणा भी की।

भारत बनाम पाकिस्तान

भारत और पाकिस्तान 30 मार्च को हुए विश्व कप के सेमीफाइनल में आमने सामने थे। करोड़ों लोगों की निगाहें इस मैच पर लगी हुई थीं। भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को भी मैच देखने के लिए आमंत्रित किया था। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 260 रनों का स्कोर खड़ा किया जिसमें सचिन तेंदुलकर के 85 रनों का अहम योगदान था। सचिन अपने शतकों का शतक पूरा करने से चूक गए। इसके बाद पाकिस्तान की पूरी टीम अंतिम ओवर में 231 रनों पर ही सिमट गई और भारत को 29 रनों की जीत हासिल हुई। सचिन तेंदुलकर को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

मैन ऑफ द टूर्नामेंट

भारत के हरफनमौला ऑलराउंडर खिलाड़ी युवराज सिंह विश्व कप के सबसे बड़े स्टार साबित हुए हैं। अपनी योग्यता और दबाव में भी बेहतरीन प्रदर्शन करने की कला ने ही युवराज को विश्व कप का मैन ऑफ द टूर्नामेंट बनाया। युवराज ने पूरे टूर्नामेंट में चार बार मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता। बल्ले के अलावा युवराज ने गेंद से भी कमाल दिखाया और 15 विकेट झटके। वह अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप के एक मैच में 50 रन भी बनाए हैं और पांच विकेट भी चटकाए हैं। युवराज ने चार बार मैन ऑफ द मैच रहे अरविंद डिसिल्वा (1996) और लॉन्स क्लूजनर (1999) की बराबरी कर ली है।

सचिन

मैन ऑफ रिकॉडर्स के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर का 21 सालों का विश्व कप जीतने का सपना आखिरकार पूरा हो गया। अपना छठा विश्व कप खेल रहे सचिन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हुए सचिन ने एक दिवसीय क्रिकेट में अपने 18000 रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया। सचिन विश्व कप में 2000 रन बनाने वाले दुनिया केेपहले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

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